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Breaking : गांव की गली में घूम रहा था पांच फिट का मगरमच्छ, ग्रामीणों के उड़े होश

- पकडऩे के लिए ग्रामीणों ने वन विभाग को जानकारी दी, लेकिन वन अमला मौके पर नहीं पहुंचा

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Breaking : गांव की गली में घूम रहा था पांच फिट का मगरमच्छ, ग्रामीणों के उड़े होश

Breaking : गांव की गली में घूम रहा था पांच फिट का मगरमच्छ, ग्रामीणों के उड़े होश

जांजगीर-चांपा. कोटमीसोनार के गली कूचों में मगरमच्छ बिलबिला रहे हैं, लेकिन वन विभाग का इस ओर ध्यान नहीं जा रहा है। जबकि सरकार ने करोड़ों की लागत से कोटमीसोनार में मगरमच्छों के संरक्षण के लिए क्रोकोडायल पार्क का निर्माण किया है। इसमें ऐसे मगरमच्छों को पनाह देना है। हर बार की तरह बुधवार की रात भी गांव की गली में मगरमच्छ स्वच्छंद विचरण कर रहा था। इसे पकडऩे के लिए ग्रामीणों ने वन विभाग को जानकारी दी, लेकिन वन अमला मौके पर नहीं पहुंचा। आखिरकार ग्रामीण दहशत के साए में रात बिताई।

गौरतलब है कि वर्ष 2007 में जिले के कोटमीसोनार में तीन करोड़ की लागत से देश का दूसरे नंबर का क्रोकोडयल पार्क का निर्माण किया गया है। जिसमें गांव के आसपास के मगरमच्छों को संरक्षित करना है। सरकार ने यहां पार्क का निर्माण तो कर दिया, लेकिन गांव के अन्य तालाबों में पल रहे मगरमच्छों को आज तक मूड़ा तालाब में शिफ्ट नहीं किया। अलबत्ता गांव के अन्य तालाबों के मगरमच्छ गांव की गलियों में स्वच्छंद विचरण करते हैं। हर रोज की तरह बुधवार की रात गांव के उपरोहित तालाब के पास पांच फिट का मगरमच्छ फिर विचरण कर रहा था। जिसे गांव के लोगों ने देखा और वन विभाग के अफसरों को इसकी सूचना दी।

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वन विभाग के लोगों ने यह कहकर बातों को टाल दिया कि रात को आखिर कैसे इसे पकड़ा जा सकता है। आखिरकार ग्रामीण दहशत के साए में रात बिताई। वन विभाग का अमला सांप भगाने के बाद लकीर पीटने की बात को चरितार्थ करते हुए गुरुवार की सुबह गांव पहुंचा। उक्त मगरमच्छ की तलाश की गई, लेकिन वह मगरमच्छ फिर उपरोहित तालाब में घुस गया।

आए दिन हो रहे दुर्घटना के शिकार
गांव के हर तालाब में मगरमच्छ बिलबिला रहे हैं। इससे गांव के लोगों को तालाब में निस्तारी करने में घबराहट होती है। यहां के लोग तालाब में स्नान करने में घबराते हैं, क्योंकि उन्हें इस बात का डर सताते रहता है कि कहीं मगरमच्छ अपना निवाला न बना ले। यहां बीते दस सालों के बीच दर्जनों लोग ऐसे मगरमच्छ के शिकार हो चुके हैं। हालांकि किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन मौत के मुंह से वापस जरूर आ गए हैं।

कमाई का जरिया बना फंड
दिलचस्प बात यह है कि ऐसे मगरमच्छों के संरक्षण के लिए वन विभाग के पास सालाना करोड़ो का बजट आता है जो वन विभाग के अफसरों का निवाला बन जाता है। यहां के प्रत्येक तालाबों में मगरमच्छ है। जिसे वन विभाग के द्वारा पकड़कर क्रोकोडायल पार्क में शिफ्ट करना रहता है, लेकिन फंड कहां जाता है। किसी को पता भी नहीं चलता।

अभियान चलाकर करेंगे शिफ्ट
गांव के बहुत से तालाब में मगरमच्छ मिलने की सूचना है। जिसे गर्मी के दिनों में जब तालाबों में पानी कम होगा तब क्रोकोडायल पार्क में शिफ्ट करने प्लान बनाया जाएगा। बुधवार की रात भी गांव में जब मगरमच्छ मिला था तो कर्मचारी उसे क्यों पकडऩेे नहीं गए इसकी जानकारी लेता हूं- उत्तम कुमार गुप्ता, डीएफओ