
पद्मश्री के लिए चयन होने के बाद अब हर कोई बापट की समाज सेवा और उनके आदर्शो को जानने के लिए उत्सुक है। सच में वे रियल लाइफ के द रियल हीरो हैं।
जांजगीर-चांपा. असल जिंदगी में अपने बूते एक मुकाम बनाया है दामोदर गणेश बापट ने। उन्होंने फिल्मी हीरो की तरह तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए रियल लाइफ में हीरो की भूमिका निभाई है। पद्मश्री के लिए चयन होने के बाद अब हर कोई बापट की समाज सेवा और उनके आदर्शो को जानने के लिए उत्सुक है। सच में वे रियल लाइफ के द रियल हीरो हैं। उनका पूरा नाम है दामोदर गणेश बापट। उनकी कार्यस्थली छत्तीसगढ़ में जांजगीर-चांपा जिले के चंापा शहर से महज कुछ दूर पर स्थित कुष्ठ निवारक संघ आश्रम के नाम से है। यहीं वे नर सेवा नारायण सेवा के सिद्धांत को अमल में ला रहे हैं। उन्होंने कुष्ठ पीडि़तों की सेवा में अपनी पूरी जिंदगी लिख दी है।
भारतीय कुष्ठ निवारक संघ को संयोग से वर्ष 1972 में सेवाभावी 35 वर्षीय युवक बापट प्राप्त हुआ। वे मूलत: ग्राम पथरोट, जिला अमरावती (महाराष्ट्र) के हैं। तीन भाईयों में सबसे छोटे बापट की प्रारंभिक शिक्षा मूर्तिजापुर में हुई। पिता गणेश विनायक बापट रेलवे कर्मचारी थे। बापट ने गोविंदराम सक्सेनिया कॉलेज आफ कामर्स नागपुर से बीए व बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही उनके मन में सेवा की भावना कूट-कूटकर भरी थी। वह 9 साल की आयु से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए। 1967 में पिता के गुजरने के बाद उन्होंने मां को संभाला। बड़े भाई की शादी व बच्चे होने पर मां उनके पास चली गई।
इस दौरान उन्हें स्वामी विवेकानंद के साहित्य से नर सेवा की प्रेरणा मिली और उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी नर सेवा में गुजारने का संकल्प लिया। वे छत्तीसगढ़ के वनवासी कल्याण आश्रम जशपुरनगर पहुंचे और वनवासियों को पढ़ाने लगे। यहां रहते हुए बापट को ग्राम सोठीं स्थित कुष्ठ निवारक संघ की जानकारी हुई।
यहां कुष्ठ रोगियों की सेवा देख वह काफ प्रभावित हुए। कुछ दिन बाद बापट स्व. कात्रे के पास आए और पूरी तरह से स्वस्थ होते हुए कुष्ठ रोगियों की सेवा में लग गए। इसके लिए उन्होंने शादी तक नहीं की।
सादगी से रहते हैं बापट
बापट आश्रम में बेहद सादगी से रहते हैं। उनके लिए अलग से कोई विशेष व्यवस्था नहीं है और न ही अतिरिक्त सुविधाएं। कभी भी कोई आकर सीधे उनसे मिल सकता है और अपनी बात कह सकता है। वे सरल व सहज और मृदुभाषी हैं और अपने काम ? में मगन रहते हैं।
Published on:
28 Jan 2018 10:32 am
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