
जांजगीर-चांपा. पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल कमरीद की प्राचार्य कुमुदनीबाघ द्विवेदी उपस्थित रहीं। उनका मानना रहा कि सरकारी व निजी स्कूलोंं में समान शिक्षा पद्धति लागू होना चाहिए और बच्चों के प्रवेश भी समान उम्र में होना चाहिए।
प्राचार्य द्विवेदी ने समान शिक्षा पद्धति की वकालत करते हुए बताया कि वर्तमान में सरकारी स्कूलों में बच्चों को छह साल की उम्र में प्रवेश मिलता है, जबकि निजी शालाओं में बच्चे ढाई से तीन वर्ष के बीच प्रवेश लेते हैं, जिससे उनके बीच सीखने का अंतर आ जाता है, जो तीन साल का गैप होता है, उसमें निजी स्कूलों के बच्चे काफी हद तक शिक्षा की बेसिक जानकारियों के साथ वर्तमान में चल रहे कम्प्यूटर की शिक्षा हासिल कर चुके होते हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में छह साल में बच्चों का प्रवेश होता है, जहां उन्हें अ 'अनारÓ से शिक्षा प्रारंभ करनी होती है। इसी तरह दोनों स्कूलों के सिलेबस भी एक समान होने चाहिए, जिससे शिक्षा ग्रहण करने के बाद बच्चों को अलग से कोचिंग की जरुरत ही ना पड़े।
प्राचार्य द्विवेदी ने यह भी बताया कि शिक्षा की इस असमानता को सरकार दूर करने का प्रयास कर रही है। इसकी शुरूआत हायर सेकेंडरी कक्षाओं से किया गया हैए जहां प्रदेश के स्कूलों में भी बच्चे सीबीएसई के पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में सरकारी स्कूलों में भी प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाई कराया जा रहा है। इसका फायदा उन स्कूलों के विद्यार्थियों को मिल रहा है, जहां शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों के बिना भी बच्चों को कोर्स पूरा कराया जा रहा है।
इसी तरह उन्होंंने बालिकाओं की शिक्षा को अनिवार्य बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पालकों की मानसिकता संकीर्ण है। इसमें बदलाव के लिए प्रयास तो किए जा रहे हैं, लेकिन जो प्रभाव दिखना चाहिए वह नहीं दिख रहा है। पालक बालिकाओं को 5वीं या 8वीं कक्षा के बाद स्कूल भेजने से हिचकते हैं। उन्होंने पालकों व शिक्षकों से इस दिशा में सकारात्मक पहल का आग्रह किया है। उन्होंने शिक्षा गुणवत्ता में सुधार की बात भी कही है।
Published on:
12 Apr 2018 02:44 pm
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