
जांजगीर-चांपा. जिले में अर्ली वेरायटी धान की बालियां अब लहराने लगी है। किसान थोड़े दिन बाद नई फसल के धान का उपयोग करने लगेंगे। हालांकि अभी धान पकी नहीं है। दशहरा के बाद फसल पक जाएगी। इसके बाद फसल कटाई का काम भी शुरू हो जाएगा। इस वर्ष कम बारिश के कारण फसल को लेकर किसान चिंतित है।
जिले में इस वर्ष दो लाख 56 हजार हेक्टेयर में धान की बोनी की गई है। इसमें तकरीबन 35 हजार हेक्टेयर में अर्ली वेरायटी के धान यानी महामाया, एमटीयू 1010, मूर्णिमा धान की बोनी की गई है। अमूमन कम समय यानी 100 दिन में पकने वाले धान की बोनी गरीब वर्ग के किसान करते हैं। क्योंकि उन्हें आर्थिक तंगी के कारण जल्दी पकने वाले फसल की जरूरत पड़ती है। जिले में ऐसे हजारों किसान हैं, जिन्हें कम समय में पकने वाली फसल की जरूरत पड़ती है।
दूसरा कारण यह भी है कि अर्ली वेरायटी के धान की वहां बुआई की जाती है, जहां सिंचाई सुविधा कम होती है। इसे देखते हुए किसान 100 दिन में पकने वाले धान की बोनी करते हैं। इन दिनों महामाया, एमटीयू 1010, मूर्णिमा धान की बालियां पकना शुरू हो चुकी है। किसान फसल पूरी तरह पकने का इंतजार कर रहे हैं।
जैसे ही फसल पकेगी किसानों को बहुत जल्द लाभ मिलना शुरू जाएगा। किसानों के मुताबिक अब फसल पकने में पखवाड़े भर का समय लगेगा। संभवत: दशहरा मनाने के बाद धान कटाई का काम शुरू कर देंगे। हालांकि इस वेरायटी के धान में कीटप्रकोप की संभावना दिखाई दे रही है, जिसे देखते हुए किसान कीटनाशक दवा का छिड़काव कर रहे हैं।