
देश में ही नहीं विदेशों में भी होगी नीम के फूल की बड़ी का व्यापार, की जा रही तैयारी, चांपा को मिलेगी अलग पहचान
बहेराडीह. आयुर्वेद में नीम का अपना एक अलग ही महत्व है। सालभर में एक बार ही नीम के पेड़ पर फूल आता है, वह भी अप्रैल माह में। नीम फूल को जहां एक ओर लोग बड़े शौक से सब्जी बनाकर खाते हैं। वहीं इस बार चाम्पा से लगे बहेराडीह उर्फ भदरीपाली के गंगे मैय्या स्व सहायता समूह की महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर इस समय व्यापारिक तौर पर नीम फूल की बड़ी बनाने का काम शुरू किया है।
इस प्रकार की बड़ी की बिक्री वह न सिर्फ भारत में करेंगें, बल्कि ऑनलाइन शॉपिंग भी अन्य देशों में भी करने की तैयारी महिला समूह की महिलाएं कर रही हैं। इस संबंध में गंगे मैय्या स्व सहायता समूह की पदाधिकारी पुष्पा यादव ने बताया कि वे इस समय उड़द दाल के साथ नीम की फूल को गर्म पानी में उबालकर बड़ी बनाई जा रही है। इस बड़ी का उपयोग न सिर्फ सब्जी बनाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। बल्कि बिजौड़ी के रूप में अधिकतर लोग खाने में उपयोग करते हैं।
महंगे दामों पर बिकती है नीम फूल की बड़ी
उल्लेखनीय हैं कि पपीता, आलू, लाई, जिमीकंद, कुम्हड़ा मखना, मुनगा व अन्य बड़ी की तुलना में नीम की फूल की बड़ी की कीमत चार गुना अधिक होती है। बाजार में इस बड़ी की कीमत पिछले साल एक हजार रुपये प्रति किलो रही।
उन्होंने बताया कि वे हर साल कम मात्रा में नीम की फूल की बड़ी बनाती थी, लेकिन इस बार इस समूह की महिलाएं ग्रामीण स्व रोजग़ार प्रशिक्षण संस्थान आरसेटी जांजगीर से दस दिवसीय आचार, पापड,़ बड़ी, मसाला व सब्जी खेती नर्सरी प्रबंधन की प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इस तरह की कारोबार को जिले में कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक जिला पंचायत सीईओ तीर्थराज अग्रवाल के मागदर्शन पर संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर बढ़ाने का निर्णय लिया है और स्व रोजगार गांव में ही स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नीम की फूल से बनी बड़ी की मांग को देखते हुए इस बार बड़े पैमाने पर बड़ी तैयार की जा रही है।
नीम के पेड़ से आच्छादित है बहेराडीह गांव
जिले में बहेराडीह एक ऐसा गांव है। जहां चहुं ओर नीम की झाड़ दिखाई देंगी। करीब एक हजार की आबादी वाला यह गांव कृषि विज्ञान केंद्र की गोद ग्राम है। वहीं कृषि विभाग ने जिला प्रशासन के सहयोग से इस गांव को जैविक खेती मिशन के तहत चयनित किया है। यहां के महिला समूहों और खेती किसानी के नवीन तकनीक को देखने कई देशों के लोग आते हैं। वहीं इस गांव की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर दिलाने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण योगदान है।
कलेक्टर ने नीम गांव कहकर किया था संबोधित
जनभागीदारी शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दीनदयाल यादव ने बताया कि 22 जून 2005 को शासकीय प्राथमिक विद्यालय के उन्नयन कार्यक्रम में बहेराडीह पहुंचे जिले के कलेक्टर डॉ. बीएल तिवारी ने इस गांव की शांतिप्रिय वातावरण और सड़क मार्ग के दोनों तरफ नीम की पुराने-पुराने झाड़ को देखकर उन्होंने स्कूल परिसर में लगे नीम के छाया के नीचे बैठकर सभा स्थल से नीम गांव कहकर संबोधित किया था। उनके इस उदबोधन से यहां के ग्रामीणों उनके इस विचार की जमकर सराहना किए थे।
Updated on:
19 Apr 2020 06:31 pm
Published on:
19 Apr 2020 06:28 pm
बड़ी खबरें
View Allजांजगीर चंपा
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
