
जांजगीर-चांपा. दो जनवरी को माघी पूर्णिमा छेरछेरा पुन्नी है। इस दिन अन्नदान की परंपरा है। छेरछेरा के दिन शहर से लेकर गांव तक की गलियों में घूम-घूम कर लोग धान मांगते है। अन्न का पर्व छेरछेरा दो जनवरी को मनाया जाएगा। इस पर्व में अन्न दान का विशेष महत्व है। छेरछेरा लोकपर्व पर ग्रामीण अंचलों में बच्चों की टोलियां उत्साह के साथ छेरछेरा पर्व को मनाते हुए अन्न दान लेने के लिए निकलती है। नए चावल से व्यंजन बनाकर पूजन करने के साथ घर आने वाले मेहमानों को खिलाया जाता है।
लोकपर्व छेरछेरा दो जनवरी को आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। फसल के खेतों से खलिहानों में आने की खुशी और अच्छी फसल को लेकर पुष्य नक्षत्र में लोक पर्व छेरछेरा मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन से ग्रामीण अंचलों में शुभ कार्यों की भी शुरुआत हो जाती है। छेरछेरा, कोठी के धान ल हेरते हेरा जैसे पारंपरिक बोल के साथ छेरछेरा के दिन बच्चों की टोली घर-घर जाकर अन्न मांगती हैं।
किसान भी खुले हाथों से बच्चों को अन्न का दान करते हैं। इस दिन लोक गीतों की भी बहार रहती है। यह पर्व किसानों की खुशी का पर्व होता है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि प्रधान संस्कृति ग्रामीण जन-जीवन संपदा और समानता को प्रकट करता है। इस पर्व को मनाए जाने के लिए ग्रामीण अंचलों में लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी है।
छेरछेरा पुष्य नक्षत्र में मनेगा
छेरछेरा पर्व किसानों के लिए अत्यंत खुशी का पर्व होता है। इस बार छेरछेरा पर्व पुष्य नक्षत्र में पड़ रहा है, जो कि किसानों के लिए सुख समृद्धि का द्योतक है। इस दिन दान करने का अपना अलग महत्व है। लोग अपने घरों पर आने वालों को दान देकर खुशियां बांटते हैं। यह पर्व आपसी प्रेम व सौहाद्र्र को बढ़ाने वाला है। पूर्णिमा का दान पुराणों अनुसार भी श्रेष्ठ होता हैए इस दिन दान करने से मनोकामनाएं भी पूरी होगी।
पक्षियों के लिए टांगते हैं अन्न
ज्योतिषियों ने बताया कि छेरछेरा में अन्न दान देने की परंपरा है, जिसे पूरा करने के साथ एक यह भी परंपरा है कि पक्षियों के लिए भी अन्नदान किया जाए। पक्षियों के लिए धान दान किया जाता है। पक्षियों के लिए लोग धान घरों के बाहर दरवाजे सहित अन्य जगहों पर बालियों के रूप में टांगते हैं, इसे पक्षी खाते हैं। यह घरों के पूजा स्थल में भी टांगा जाता है, जिसे काफी शुभ माना जाता है।
पारंपरिक व्यंजनों का है महत्व
प्रत्येक पर्व में बनाए जाने वाले व्यंजनों का अपना अलग महत्व होता है। छेरछेरा पर्व में नए चावल से पारंपरिक व्यंजन बनाने की भी परंपरा है। छेरछेरा के दिन चावल के बने पकवानों से पर्व की खुशियां भी दोगुनी हो जाती हैं। घर में आने वाले मेहमानों का स्वागत भी पारंपरिक व्यजनों से किया जाएगा।
Published on:
29 Dec 2017 05:56 pm
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