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कलेक्टर की फटकार का भी इस ठेकेदार पर नहीं हुआ कोई असर

90 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से बन रही 41.26 किलोमीटर लंबी सड़क

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90 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से बन रही 41.26 किलोमीटर लंबी सड़क

90 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से बन रही 41.26 किलोमीटर लंबी सड़क

जांजगीर-चांपा. सीपत से बलौदा होते हुए उरगा तक 90 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से बन रही 41.26 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण में ठेकेदार राहगीरों की जान जोखिम में डालने से भी पीछे नहीं हट रहा है।

पत्रिका द्वारा लगातार खबर प्रकाशन के बाद भी जिले के नए कलेक्टर नीरज बनसोड़ ने टीएल की बैठक में निर्माण एजेंसी सीजीआरडीसी के इंजीनियरों सहित ठेकेदार को भी जमकर फटकारा था और नियम कायदों के साथ करने की नसीहत दी थी, लेकिन कलेक्टर की नसीहत के बाद भी ठेकेदार की कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।

ताजा मामला बलौदा बस स्टैंड के पास का है। ठेकेदार ने यहां पुलिया निर्माण के लिए सड़क को खोदा आधी पुलिया की ढलाई करके छोड़ दिया है। उसके द्वारा यहां रात में सुरक्षा के लिए न तो रेडियम पट्टी लगाई गई है और न ही कोई बेरीकेट्स लगाए गए हैं। इससे एक बाइक चालक बुधवार रात इस पुलिया में बाइक सहित जा गिरा। ढाली गई आधी पुलिया में काफी मात्रा में लोहे की राड निकली है। इससे बाइक चालक को जहां काफी चोट आई वहीं उसकी पूरी बाइक क्षतिग्रस्त हो गई।

लोगों का कहना है कि बाइक सवार की किस्मत अच्छी थी। यदि एक भी लोहे का राड उसके बेट, सीने या सिर में घुसने पाता तो उसकी मौके पर ही मौत हो जाती है। लेकिन शायद सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार सुनील कुमार अग्रवाल को अगर कोई मौत भी हो जाए तो भी कोई सरोकार नहीं है।


रहता है वाहनों का दबाव
बलौदा से गुजरने वाली इस सड़क पर 24 घंटे वाहनों का काफी दबाव रहता है। यहां रात दिन भारी वाहनों का आना जाना होता है। ऐसे में ठेकेदार द्वारा इतनी बड़ी गलती करना समझ से परे है। उसे चाहिए था कि पहले आधी पुलिया को बनाने के दौरान बेरीकेट्स से वहां सुरक्षा के उपाए करने थे, या ईंट की कोई दीवार बनाकर उसे रेडियम पट्टी लगाना था।

इससे वाहन चालक उससे कम दुर्घटनागस्त होते। लेकिन इस तरह पुलिया को बनाकर और उसके आगे खाईनुमा गड्ढा खोदकर छोड़ देना निश्चित तौर पर यह दर्शाता है कि ठेकेदार और विभाग के अधिकारियों को लोगों की जिंदगी से कोई सरोकार नहीं है।