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पढि़ए खबर, इस तरह के आयोजनों से अकलतरा की बनी अलग पहचान

- सुगम संगीत गायक शीतल दास ने विभिन्न रागो मे गजल व भजन गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया

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पढि़ए खबर, इस तरह के आयोजनों से अकलतरा की बनी अलग पहचान

अकलतरा. एमबी रोकड़े स्मृति संगीत समारोह समिति की सुरमयी प्रस्तुति ने नगर के सांस्कृतिक इतिहास में एक और सुनहरा पन्ना जोड़ दिया है। यह बात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लक्ष्मण मुकीम ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि संस्कृति के क्षेत्र मे समिति द्वारा किये जा रहे संगीत आयोजनों से निश्चित ही अकलतरा की अलग पहचान बनी है।

पूर्व विधायक सौरभ सिंह ने कहा कि मैं समिति के कार्यक्रमों से प्रारंभ से ही जुड़ा हूं तथा उसके शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के कठिन काम की प्रशंसा करता हूं। विशिष्ट अतिथि एवं नगर पालिका अध्यक्ष खुलन सोनवानी ने शास्त्रीय संगीत के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा की लुप्त होते जा रही परंपरा को पुनर्जीवित करने के कार्य को बहुत बड़ा काम बताते हुए प्रतिवर्ष संगीत का ऐसा अनूठा कार्यक्रम करवाने के लिए समिति को शुभकामनाएं दी।

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कार्यक्रम का शुुभारंभ खैरागढ़ के आंगिक डांस गु्रप के नयनाभिराम कत्थक नृत्य से हुआ। गु्रप ने अपने नृत्य की शुरूआत शिव वंदना से की। तत्पश्चात उसने विलंबित लय मे थाट, मध्य लय मे तोड़ा परन, दु्रत लय मे निकास तथा अंत मे भजन गोविन्दा, ठुमरी मै कान्हा तोसे हारीतथा राग देश मे तराना प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।

दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट तथा कर्तलध्वनि से उसके कार्यक्रम को खूब सराहा। कार्यक्रम की द्वितीय प्रस्तुति नागपुर के वाल्मिक सजयांडे ने संतूर पर दी। उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरूआत राग किरवानी मे आलाप से की। इसके बाद तीनताल विलंबित प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने कार्यक्रम की समाप्ति राग मिक्स पहाड़ी मे एक धुन बजाकर की। उनके साथ बिलासपुर के राजेश मौंदेकर ने तबले पर संगत की। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति खैरागढ़ के ही शीतल दास तथा साथियों की रही। राहुल मिश्र ने अपने कार्यक्रम की शुरूआत राग जोग मे एक बंदिश गाकर की।

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उन्होंने राग हंस ध्वनि तीनताल मे निबद्ध लागी लगन तोसे सखि पति संग भी पेश की जिसे दर्शको ने सराहा। सुगम संगीत गायक शीतल दास ने विभिन्न रागो मे गजल व भजन गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने राग पहाड़ी पर आधारित किसी की याद आती है तथा राग जोग मे भजन तथा भजन पैरोड़ी सुनाकर श्रोताओं से खूब तालियां बटोरी। गुरुजी के शिष्य बलभद्र प्रसाद शुक्ल सक्ति, केआर कश्यप हसौद तथा संतो नवजया अग्रवाल ने भी अपनी-अपनी रचनाएं पेश की। कार्यक्रम का संचालन छेदीलाल शर्मा ने तथा आभार प्रदर्शन नवल अग्रवाल ने किया।

इस अवसर पर डॉ. केआर अग्रवाल, राधेश्याम शर्मा, दीनदयाल अग्रवाल, विनोद सिंघानिया, जेएल भानू, आरसी मिश्रा, एमएल पाण्डे, कैलाश पुरोहित, नरेश केडिया, नरेश अग्रवाल बिल्हा मिल, शैलेन्द्र सिंह, श्रीनिवास जैन, राजेश अग्रवाल , अशोक माखिजा, अमित केडिया, दिनेश लिखमानिया, जवाहर नारायण साहू, रमेश सोनी, प्रवीण लाटा, जवाहर सिंह सोनसरी, वेद महाराज झलमला, डाकेश्वर पटले फरहदा, संतोष पटेल परसाही, संतोष साहू, संतोष श्रीवास, चन्दराम साहू, मुरारी ताम्रकार समेत जन समूह उपस्थित था।

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