
,farmar earned thousands of rupees from grass farming in cg
संजय राठौर@जांजागीर-चांपा. प्रदेश में धान की खेती की परंपरा और क्रेज के बीच एक किसान घास की खेती कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये कोई साधारण घास नहीं है इसे ग्रीन फर्टिलाइजर कहा जाता है।
खेत में इसके इस्तेमाल के बाद किसी प्रकार के रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती है। जिले के बम्हनीडीह ब्लॉक के ग्राम पंचायत लखुर्री के किसान रामप्रकाश केशरवानी ने अपने 10 एकड़ भूमि में ढेंचा घास उगाई है। इस घास को वो अन्य किसानों को उपलब्ध करवा रहे हैं।
केशरवानी को देखकर क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने ढेंचा घास का प्रयोग शुरू कर दिया है। इस खाद के एक नहीं बल्कि दर्जनों फायदे हैं। बड़ी बात यह है कि इस खाद से फसल में कीटप्रकोप की बिल्कुल संभावना नहीं होती। जिससे किसानों का तकरीबन 3 हजार रु.इसी में बच जाता है।
ढेंचा घास में भरपूर नाइट्रोजन की मात्रा होती है। जो सभी तरह के रासायनिक खाद की पूर्ति कर लेती है। यह खाद बहुत ही फसल के लिए लाभकारी है, इसमें कीटनाशी गुण भी पाए जाते हैं। जिले के किसान जैविक खेती के लिए इस घास का प्रयोग कर रहे है।
ऐसे होता है फायदा
कृषि अधिकारी बताते हैं कि ढेंचा घास फसल में नाइट्रोजन की कमी को दूर करता है। साथ ही इसके रोपने से रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती। मिट्टी काली व उपजाऊ हो जाती है। फसल में डीएपी, यूरिया, फास्फोरस, टॉनिक सहित अन्य रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती। इसके छिड़काव से खेत की मिट्टी हमेशा भुरभुरापन रहता है। एक एकड़ भूमि में पांच से सात क्विंटल अधिक उपज होती है।
ऐसे होता है उपयोग
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ढेंचा घास में जैविक खाद के गुण होते हैं। इसकी रोपाई फसल लगाने से पहले उस खेत में ढेंचा बीज का छिड़काव करते हैं। यही बीज जब हरी भरी घास का रूप ले लेता है, फिर उसी खेत में उस डेंचा घांस की मथाई कर मिट्टी में मिला देते हैं। ढेंचा घास की जड़ से लेकर पत्ते, तना व हर अंग खाद का काम करता है।
इस घास के गुण
Published on:
19 Aug 2023 03:47 pm
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