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हड्डी रोग से पीडि़त मरीजों को मिल सकती है राहत, पर नेत्र विभाग में अब भी अंधेरा, नहीं हो रहा मोतियाबिंद का ऑपरेशन, ये है वजह…

Health: जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में अंधेरा ढाई माह बाद भी कायम है। नेत्र चिकित्सक डॉ. मनोज राठौर के तीन माह की लंबी छुट्टी पर चले जाने से यहां आंखों का इलाज और आपरेशन नहीं हो पा रहा है।

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हड्डी रोग से पीडि़त मरीजों को मिल सकती है राहत, पर नेत्र विभाग में अब भी अंधेरा, नहीं हो रहा मोतियाबिंद का ऑपरेशन, ये है वजह...

हड्डी रोग से पीडि़त मरीजों को मिल सकती है राहत, पर नेत्र विभाग में अब भी अंधेरा, नहीं हो रहा मोतियाबिंद का ऑपरेशन, ये है वजह...

जांजगीर-चांपा. डॉ. राठौर को छुट्टी पर गए ढाई माह होने को हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन किसी दूसरे नेत्र चिकित्सक की व्यवस्था नहीं कर पाए। इधर सरकार द्वारा पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग में किए गए फेरबदल से जरूर जिला अस्पताल को दो नए चिकित्सा अधिकारी मिल गए हैं। इससे मरीजों को काफी राहत मिलेगी। इसमें एक अस्थि रोग तो दूसरा शिशु रोग चिकित्सक हैं। नेत्र विभाग में डॉक्टर के नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराने की मंशा से जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को मायूसी हाथ लग रही है।

वहीं जिला अस्पताल में हड्डी रोग के चिकित्सक की भारी जरूरत थी। अस्थि रोग विभाग एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा था। डॉ. चंदेल के जाने के बाद डॉ. वस्त्रकार द्वारा ही इलाज किया जा रहा था। ऐसे में मरीजों को भारी परेशानी हो रही थी। डॉ. वस्त्रकार की इमरजेंसी या पोस्टमार्टम ड्यूटी रहती, तो उसके अगले दिन अस्पताल हड्डी चिकित्सक विहीन हो जाता था। अब डॉ. राठौर के आ जाने से काफी राहत मिल रही है।

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डॉक्टरों को रास नहीं आ रहा जिला अस्पताल
जिला अस्पताल डॉक्टरों को रास नहीं आ रहा है। यहां एक के बाद एक डॉक्टर नौकरी छोड़कर जा रहे हैं। पहले ब्लड बैंक में पदस्थ लैब टेक्निशियन ने नौकरी से रिजाइन दिया तो इसके बाद स्त्री रोग चिकित्सक डॉ. सप्तर्षी चक्रवर्ती ने भी अपना इस्तीफा अस्पताल को दे दिया था। हालांकि उनको किसी तरह मनाकर रोक लिया गया है। वहीं इसके बाद नेत्र चिकित्सक डॉ. मनोज राठौर ने लंबी छुट्टी का आवेदन थमा दिया। इस तरह एक के बाद एक डॉक्टरों के यहां से जाने पर अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न लग रहा है।