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इसका सबसे बड़ा दूरगामी फायदा शारीरिक रूप से स्वस्थ्य होना बता रहा है। अमूमन हम रेत, गिट्टी समेंट, ईंट व सरिया से घर बनाने की परंपरा को देखते आए हैं, लेकिन जांजगीर का धर्मेंद्र सिंह राणा ने गुड़, गोंद व चूना के गारा से ईंट की जुड़ाई कर इकोफे्रंडली हर्बल होम बनवा रहा है। धर्मेंद्र का मानना है कि इस पद्धति से मकान निर्माण में हमें प्रमुख रूप से सेहत पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा और इन दिनों कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। खासकर, अस्थमा, बीपी, शुगर, हार्ट जैसे कई तरह की बीमारी से निजात मिलेगी। उनका मानना है कि मौजूदा समय में हर वर्ग के लोग स्मार्टनेस के फेर में टाईल्स, मार्बल का इस्तेमाल कर घरों का निर्माण कर रहे हैं। जो हमारे शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है। खासकर, घरों में वेंटीलेशन नहीं होने से घर के एसी जैसे कृत्रिम हवाओं से सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। जिसके चलते लोग बीमार पड़ रहे हैं। लेकिन हर्बल होम में ऐसी बीमारियां आसपास में नहीं फटकेगी।
इस तरह बना रहे गारा
मकान निर्माण में मिस्त्री रेत, सीमेंट के बजाए गुड़, गोंद व चूना के गारा से ईंट की जुड़ाई कर रहे हैं। तीनों सामानों को पहले १५ दिन तक टैंक में सड़ाया जा रहा है। इसके बाद इसी गारे से ईंट की जुड़ाई कराई जा रही है। खास बात यह है कि यह गारा सीमेंट की जुड़ाई से ज्यादा मजबूत बन रही है। इतना ही नहीं सरिया की जगह लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
गुंगुर धूप, नीला थोथा व पटुआ से छत की ढलाई
धर्मेंद्र ने बताया कि छत की ढलाई भी हर्बल पद्धति से कराई जाएगी। जिसमें गुंगुर धूप, नीला थोथा व पटुआ से छत की ढलाई की जाएगी। जिसमें सूर्य का चाहे जितना प्रकाश पड़े, घर हमेशा एक सामान्य टेंप्रेचर में रहेगा। हमें गर्मी में एसी लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, तो वहीं ठंड में अलाव जलाना भी नहीं पड़ेगा।
यह है खास बात
० घर पूरी तरह से इकोफे्रंडली रहेगा
० गर्मी में एसी की जरूरत नहीं
० बिजली की बचत
० कूलिंग सिस्टम हमेशा सामान्य
० कई तरह की बीमारियों से निजात
० धुआं को दीवार अवशोषित कर लेगी
० लागत बेहद कम
० भूकंप रोधी
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Published on:
22 Dec 2022 09:08 pm
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