
डॉ. आरके प्रसाद पर लगा था बच्चा बदलने का आरोप
जांजगीर-चांपा. जिले मुख्यालय में अपनी शिशु चिकित्सा की दुकान चला रहे डॉक्टर प्रसाद जिला अस्पताल की बदहाली का जमकर फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने वहां की नर्स और डॉक्टरों से अच्छी खासी सेटिंग करके रखी है,
जिससे डिलवरी नॉर्मल हो या सिजेरियन बच्चा पैदा होने के बाद उसे गंभीर बताकर सीधे शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके प्रसाद के पास भेज देते हैं। इतना ही नहीं बच्चे को लेकर परिजन नहीं बल्कि जिला अस्पताल की नर्स ही अपनी ड्यूटी छोड़कर पहुंचाने जाती हैं। इलाज के दौरान यदि कोई बच्चा मर जाता है और परिजन उस पर बवाल खड़ा करते हैं तो डॉ. प्रसाद के पास जिला अस्पताल के नाम से छपे सादे रेफर कार्ड हैं,
जिस पर वह अपनी मर्जी से बच्चे की तकलीफ का जिक्र करके परिजनों को मूर्ख बनाने का काम करते हैं। ऐसे ही कुछ डॉ. प्रसाद ने उदयबंद निवासी पंचराम के नवजात बच्चे के मरने पर किया। प्रसाद ने जो रेफर कार्ड परिजनों को दिखाया उसमें न तो कोई सील मोहर था न रेफर करने वाले डॉक्टर के हस्ताक्षर और न ही रेफर नंबर जो कि अस्पताल के रजिस्टर में एंट्री होने के बाद ही जारी होता है। सीएमएचओ और सिविल सर्जन डॉ. वी जय प्रकाश ने ऐसे रेफर फार्म का फर्जी बताया है और मामले की जांच करने की बात भी कही है।
जानकारी के मुताबिक जांजगीर थाना अंतर्गत उदबंद गांव के निवासी पंचराम की पत्नी सविता बाई ने 22 सितंबर को जिला अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया था। अचानक जिला अस्पताल की नर्स बच्चे को गंभीर बताते हुए खुद ही उसे लेकर डॉ. प्रसाद के अस्पताल पहुंच गई। डॉक्टर ने बच्चे को एसएनसीयू में रखा और दो दिन बाद बच्चे को मृत बता दिया।
परिजनों ने जब उनका बच्चा बदलने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया तो डॉ. प्रसाद ने जिला अस्पताल से गंभीर होने पर बच्चे को रेफर करने का जो कार्ड दिखाया उसमें न तो कोई रेफर क्रमांक था न रेफर करने वाले डॉक्टर के साइन और सील। इस तरह के जारी होने वाले कार्ड के बारे में जब सीएमएचओ डॉ. वी जयप्रकाश से बात की गई तो उन्होंने उसे फर्जी बताया है।
नर्स और डॉक्टर का पता नहीं
जब डॉ. प्रसाद से बच्चे को जिला अस्पताल से उनके अस्पताल लाने वाली नर्स और रेफर करने वाले डॉक्टर की पहचान पूछी गई तो उन्होंने न पहचानने की बात कही। इससे साफ है कि कहीं न कहीं जिला अस्पताल के डॉक्टर नर्स और डॉ. प्रसाद के बीच लंबी सेटिंग का खेल चल रहा है।
- जिला चिकित्सालय से रेफर करने से पहले जो रेफर फार्म जारी होता है, उसमें बकायदा बीमारी व कंडीशन का जिक्र करते हुए रेफर करने वाले डॉक्टर के हस्ताक्षर और सील लगाने के साथ रेफर नंबर डाला जाता है। बिना साइन सील व नंबर के जारी कार्ड गलत है। इसकी जांच की जाएगी।
- डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ, जांजगीर-चांपा
Updated on:
29 Sept 2018 03:51 pm
Published on:
29 Sept 2018 03:51 pm
