
कैसे बने स्कूल स्मार्ट: लैपटॉप-प्रोजेक्टर डिब्बों में बंद, प्रशिक्षित टीचर ही नहीं
स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम बनाने के नाम पर लाखों रुपए के प्रोजेक्टर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, स्पीकर, कार्डलेस माउस, स्क्रीन तो भेज दिए गए हैं लेकिन कहीं इसका उपयोग पढ़ाने-लिखाने के लिए नहीं हो रहा है। क्योंकि शिक्षकों को न तो किसी तरह का प्रशिक्षण मिला है और न ही स्कूलों में कम्प्यूटर टीचर की पोस्टिंग है। नतीजन सामान सप्लाई के बाद कहीं ये सामान स्कूलों में डिब्बों से बाहर नहीं निकले हैं तो कहीं स्कूलों में तालों में कैद है। कहीं इंस्टाल हो भी गए है तो मन की बात, परीक्षा पर चर्चा जैसे खास आयोजन होने पर ही इस्तेमाल में लिए जा रहे हैं। गौरतलब है कि शिक्षा सत्र 2021-22 में जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले के 89 शासकीय मिडिल स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम बनाने की योजना तैयार की गई थी। योजना के तहत वर्तमान सत्र में संबंधित स्कूलों में समग्र शिक्षा रायपुर से सीधे ही संबंधित स्कूलों में इन सामानों की सप्लाई हो रही है। बता दें, पूर्व में भी आईसीटी योजना के तहत कई स्कूलों में ऐसे ही कम्प्यूटर, प्रोजेक्टर भेजे गए हैं जो अधिकांश स्कूलों में अब भी कबाड़ की तरह ही पड़े हैं। बच्चों को कोई फायदा नहीं मिला।
स्कूलों में कम्प्यूटर टीचर की पोस्टिंग ही नहीं
बता दें, स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम तो बनाया जा रहा है लेकिन कम्प्यूटर ज्ञान से संबंधित बच्चों को पढ़ाने-लिखाने वाले कम्प्यूटर टीचर ही किसी भी स्कूलों में नहीं है। संबंधित स्कूलों के ही एक शिक्षक को इसके लिए प्रशिक्षत कर पढ़ाने की जिम्मेदारी का दावा किया जाता है लेकिन संबंधित स्कूलों के शिक्षकों को न तो किसी तरह की ट्रेनिंग दी गई है और न ही कोई गाइडलाइन। अगर प्रशिक्षित शिक्षक होंगे तो यह योजना बच्चों के कम्प्यूटर ज्ञान सीखने में काफी मददगार साबित होगी। शासकीय स्कूल के बच्चे भी निजी स्कूल के बच्चों के तहत हाईटेक शिक्षा ले सकेंगे।
सीधे राजधानी से सप्लाई, राशि का जिक्र नहीं
बताया जा रहा है कि इन सामानों की सप्लाई सीधे राजधानी रायपुर से हो रही है। सप्लाई करने वाली रायपुर की निजी फर्म है जिसके द्वारा सामान स्कूलों में देने के बाद पावती में संस्था प्रमुखों से दस्तक्षत लिए गए है जिसमें सामग्री और संख्या का जिक्र तो है नहीं कौन सामग्री कितनी कीमत की है, इसका कोई जिक्र नहीं है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर अधिकारी भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं कि कितनी राशि इस योजना में खर्च हुई है।
इन सामानों की सप्लाई हुई
2 लैपटॉप, 2 हार्ड डिस्क, 2 स्पीकर, 2 कार्डलेस माउस, 2 प्रोजेक्टर, 2 स्क्रीन, 2 एचडीएमआई केबल, 2 पॉवर केबल
केस-1
शापूमाशा जेवरा, पामगढ़
पामगढ़ ब्लॉक के शापूमाशाला जेवरा में 6 दिसंबर 23 को स्मार्ट रूम के नाम पर प्रोजेक्टर, लैपटॉप, स्क्रीन, माउस समेत अन्य उपकरणों की सप्लाई हुई है। ये सामान अब तक डिब्बों में ही कैद है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल भवन में जगह नहीं है। अतिरिक्त कक्ष बन रहा है,जहां इन्हें लगाया जाएगा। स्मार्ट क्लास रूम संचालन के संबंध में किसी तरह का प्रशिक्षण नहीं मिला है।
केस-2
शापूमाशा सरखों, नवागढ़
शापूमाशा सरखों में एक माह पहले ही स्मार्ट क्लास रूम से संचालित सामग्री पहुंची है। यहां भी इसका उपयोग नही हो रहा है। भवन निर्माणाधीन है और बिजली व्यवस्था नहीं है। बता दें, इस विद्यालय में पूर्व में भी प्रोजेक्टर स्क्रीन मिला हुआ है जिसका समुचित उपयोग नहीं हो रहा। इसके बावजूद यहां फिर से स्मार्ट क्लास रूम बनाने सामग्री भेज दी गई है।
केस-3
शापूमाशा भैंसों, पामगढ़
शापूमाशा भैंसों पामगढ़ में दो माह पूर्व स्मार्ट क्लास रूम से संबंधित सामग्री की सप्लाई हुई है। यहां शिक्षकों के मुताबिक शनिवार को बच्चों को कम्प्यूटर ज्ञान से संबंधित एक्सट्रा एक्टिविटी कराते हैं। बाकी खास अवसरों पर प्र्रोजेक्टर आदि का उपयोग बच्चों को लाइव प्रसारण दिखाने में करते हैं।
Published on:
13 Feb 2024 09:21 pm
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