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मॉडर्न जमाने में बैलगाड़ी से दुल्हनिया लेने निकला दूल्हा, देखने उमड़ी भीड़

Janjgir champa news: कई साल बाद पुरानी परंपरा से निकली एक बारात शहर में रही चर्चा का विषय, बारात चौराहे से निकली तो लोग देखने के लिए अपने-अपने घरों से बाहर आ गए।

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मॉडर्न जमाने में बैलगाड़ी से दुल्हनिया लेने निकला दूल्हा, देखने उमड़ी भीड़

Chhattisgarh news: जांजगीर-चांपा जिले से एक हैरान कर देने वाली बारात सामने आई हैं। एक तरफ जहां बीएमडब्ल्यू और रेंज रोवर, जगुआर जैसी महंगी गाड़ियों से लोग अपनी बारात लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं पर दुल्हन को विदा कराने दूल्हा हेलीकॉप्टर से भी पहुंच रहा है। वहीं जिला मुख्यालय में जब दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार होकर अपनी दुल्हनिया लेने निकला तो हर कोई उसे निहारने लगा।

इस जिले की बारात जिस रास्ते से होकर गुजरी वहां पर लोगों ने अपने दरवाजे और छतों पर खड़े होकर इस नजारा को बखूबी देखा। जहां आज प्राचीन परंपराएं लुप्त होती नजर आ रही हैं। वहीं पर आधुनिकता के दौर में महंगी से महंगी शादियां देखने को मिल रही है। लोग अपनी बारातें महंगी कारों और अब तो हेलीकॉप्टर से भी बारात लेकर दुल्हन को विदा कराने गांव और शहरों में पहुंच रहे हैं। वहीं जिला मुख्यालय के पुरानी बस्ती निवासी इंजी. देवेन्द्र राठौर बारात बैलगाड़ी से जब बस्ती से होकर जा रही थी तो लोगों की भीड़ इसका मजा उठाती दिखाई दी। पूरे शहर होते हुए बारात शहर के ही एक स्थानीय होटल पहुंची, जहां देवेंद्र दूल्हा सहित पूरे बारातियों का स्वागत छत्तीसगढ़िया अंदाज में किया गया।

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बता दें कि यह वही कपल है, जो अपनी शादी की प्रीवेडिंग कि छत्तीसगढ़िया अंदाज में किए थे। जिला मुख्यालय जांजगीर के पुरानी बस्ती निवासी इंजी देवेंद्र राठौर छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति को संजोए रखने सबसे अलग पुराने जमाने के अंदाज में अपनी शादी के प्रीवेडिंग कुछ इस तरह से किए थे, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ था। दूल्हा देवेंद्र राठौर ने आजकल के नौजवानां को अपने संदेश में कहा था कि हमें अपनी छत्तीसगढ़ के कला एवं संस्कृति के साथ पुरानी पहनावा को नहीं भूलना चाहिए, आजकल के नौजवान पुरानी परंपरा को भूलते जा रहे हैं और नए मॉडल युग में अपनी ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।

याद आई पुरानी परंपरा

बैलगाड़ी में लगे बैल के खन-खन करते घुंघरू आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। लोग सड़क के किनारे तो कुछ लोग छतों पर खड़े होकर बैलगाड़ी पर जा रहे दूल्हे राजा व बारातियों को लगातार निहारते रहे थे। इस प्राचीन परंपरा को देखकर के लोग बहुत खुश नजर आ रहे थे। महंगी मोटर गाड़ियों और हेलीकॉप्टर के इस युग में बैल गाड़ियों से बारात ले जाना एक परंपरा का पुनर्जीवन होता दिखाई दे रहा है।

दूल्हे देवेन्द्र ने बातचीत में कहा वह शादी के लिए बहुत ही कुछ अलग करना चाह रहे थे, उन्होंने सोचा कि पहले लोग बैलगाड़ी से बारात जाया करती थी। समय के साथ बैलगाड़ी का स्थान महंगी मोटर गाड़ियों ने ले लिया साथ ही व डोली का स्थान लंबी लंबी गाड़ियों ने ले लिया तो मैंने सोचा कि क्यों ना बारात बैलगाड़ी से ले जाए जाए।

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लुगरा व धोती-बंगाली में नजर आए बाराती

देवेंद्र की बारात पूरे छत्तीसगढ़िया अंदाज से निकली तो उनके बाराती लुगरा व धोती, बंगाली में नजर आए। दूल्हा देवेंद्र राठौर का पहनावा भी पूरे छत्तीसगढ़िया अंदाज में था, तो वहीं उनके पीछे बराती के रूप चल रहीं महिलाएं लुगरा, सूता, करधन और बालों में चूंदा पहने नजर आईं। युवाओं की बात करे तो अपनी जीन्स-पेंट, कोट-शूट छोड़ पुराना पहनावा धोती-बंगाली में दिखे, जो पूरे उत्साह के साथ विवाह का आनंद ले रहे थे।