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सस्ता नशा के फेर में मौत को दे रहे दावत, सालभर में ५० से ६० मुख कैंसर के मरीज पहुंच रहे जिला अस्पताल

नशा आजकल युवाओं के सिर चढ़कर बोलने लगा है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह आसानी से उपलब्ध हो जा रहा है। खासकर सिगरेट, गुटखा व तंबाकू के सेवन करने में युवा सबसे आगे हैं। युवा वर्ग इसकी गिरफ्त में आकर अपने भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। जगह-जगह पान दुकान, किराना स्टोर्स व जनरल स्टोर्स में बिक रहे तंबाकू पाउच, सिगरेट व गुड़ाखू का नशा अब लोगों की लत बन गई है।

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सस्ता नशा के फेर में मौत को दे रहे दावत, सालभर में ५० से ६० मुख कैंसर के मरीज पहुंच रहे जिला अस्पताल

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लोग सुबह उठते ही इनका सेवन करना शुरु कर देते हैं। युवाओं में जर्दा गुटखा और सिगरेट का चलन बढा है। तंबाकू का सेवन करने वाले दो में से एक व्यक्ति की मौत कैंसर की वजह से होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार कैंसर के मरीजों में ज्यादातर 30 से 40 वर्ष की उम्र वाले हैं। डब्ल्यूएचओ ने 2030 तक कैंसर से मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 लाख तक पहुंचने की आशंका जाहिर की है। संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि रोजाना एक पैकेट सिगरेट पीने या फिर दो पाउच तंबाकू खाने वाले 90 फीसदी लोगों को 20 वर्ष के भीतर कैंसर होने की पूरी संभावना रहती है। तंबाकू में कैंसर के 43 कारक होते हैैं। सिगरेट के धुएं और गुटखे के लगातार सेवन से ये शरीर में दाखिल होते हैं। गुटखा लगातार खाने से मुंह में गहरे निशान होने लगते हैं। धीरे-धीरे वह जख्म की शक्ल लेने लगता है। जिला अस्पताल के कैंसर नोडल अधिकारी का कहना है कि कैंसर का स्क्रीनिंग किया जाता है, जिसमें मुख कैंसर के ज्यादा मरीज मिल रहे है। इसकी संख्या सालभर ५० से ६० है, जो जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराते है। बहुत से लोग बाहर अन्य जगह इलाज करा रहे है। इसमें अधिकांश युवा ही सामने आ रहे है।
गुटखा चबाने में परहेज नहीं
गुटखा पाऊच पान ठेले व किराना दुकानों में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। गुटखा खाने वालों में भी युवाओं की तादाद सबसे अधिक हैं। कम उम्र के बच्चों में भी इसकी लत है। तंबाकू का जहर लोगों की जिंदगी को धीरे-धीरे खोखला कर रहा है। एक बार चखने के शौक से शुरू होने वाली यह लत उम्र भर पीछा नहीं छोड़ती।
सेकंड स्मोकिंग के शिकार हो रहे लोग
सिगरेट पीने वाले के साथ उसके धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों को भी कैंसर का खतरा होता है। पर इस खतरे से अनजान बनकर वे धुएं में ही हर फिक्रको उड़ाने की कोशिश करते हैं। घर, चौक-चराहों व सार्वजनिक जगह में भी शौकिन लोग बड़ी शान से सिगरेट का धुंआ उड़ाते नजर आते हैं। जिससे तंबाकू का सेवन नहीं करने वाले लोग भी इसके लपेटे में आ जाते हैं और सेकंड स्मोकिंग हो जाता है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है और वह भी बेवजह कैंसर की चपेट में आ जाता है।
कैंसर के लक्षण
० सिगरेेट ज्यादा पीने वालों को कैंसर होने के पहले छाती में दर्द होने लगता है। धीरे-धीरे सांस फूलने की तकलीफ शुरू होती है।
० खांसी के साथ खून के थक्के जमने लगते हैैं।
० मुख कैंसर वालों के मुंह में पहले छाले होते हैं।
० जरा भी तीखा खाने पर मुंह जलने लगता है।
० गले में गठान हो जाती है और इसके साथ ही आवाज में बदलाव हो जाता है। आगे जाकर खाना-पीना पूरी तरह बंद हो जाता है।
० आहार नली के कैंसर की शुरुआत खाने में तकलीफ से ही होती है।
एबार्शन होने की भी बढ़ जाती है संभावना
धूम्रपान की आदी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है। जिला अस्पताल के सीएस डॉ. एके जगत के अनुसार ज्यादा धूम्रपान से एबार्शन भी हो सकता है अथवा गर्भस्थ शिशु का वजन सामान्य से कम हो सकता है और दोनों ही स्थिति घातक है।
केस.1
शौक बन गई लत
खोखरा निवासी (परिवर्तित नाम) ने स्कूल के दिनों में दोस्तों के साथ महज शौक के लिए गुटखा पाउच खाना शुरू किया था। अब वह पिछले सात साल से लगातार गुटखा खा रहा है। घर वालों की समझाइश और खुद को हो रही परेशानी की वजह से उसने कई बार गुटखा छोडऩे की कोशिश की पर नाकाम रहा। बमुश्किल एक या दो दिन तक ही वह गुटखे से दूर रह पाया और फिर मजबूरन उसे गुटखा खाना ही पड़ता है।
केस.2
मुंह नहीं खुल पा रहा
शहर के शांति नगर मोहल्ला के रामकुमार (बदला हुआ नाम) बचपन से ही गुटखे का आदी है। अब उसका मुंह पूरी तरह खुल नहीं पाता है। इससे उसे बात करने और भोजन में दिक्कत होती है। समझ आने पर उसने गुटखा छोडने की कोशिश तो कीए पर बेचैनी महसूस होने पर उसने वापस इसका सेवन शुरू कर दिया। अब वह खुद अपनी इस लत की वजह से परेशान है।
वर्जन
वर्तमान में माऊथ कैंसर के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका प्रमुख कारण है कि लोग गुटखा का ज्यादा सेवन कर रहे है। इसमें अधिकांश युवा वर्ग चपेट में आ रहा है। यह धीमी जहर का काम करता है।
डॉ. इकबाल हुसैन, नोडल कैंसर रोग जिला अस्पताल
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