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कागजों में शहर का वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सालों से नपा के खजाने में पड़े 56 लाख

नगरपालिका जांजगीर-नैला के खाते में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के नाम पर अमानत राशि के रुप में ५६ लाख रुपए जमा है। इतना ही नहीं अमानत राशि हर साल दोगुनी गति से बढ़ रही है क्योंकि लोगों के द्वारा न तो अपने भवन में यह सिस्टम लगवाया जा रहा है और न ही पालिका द्वारा अमानत राशि को राजसात कर खुद से उस राशि से सिस्टम बनवा रहा है।

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कागजों में शहर का वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सालों से नपा के खजाने में पड़े 56 लाख

कागजों में शहर का वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सालों से नपा के खजाने में पड़े 56 लाख

जांजगीर-चांपा. जिसके चलते शहर में मकान को धड़ल्ले से बन रहे हैं लेकिन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चंद घरों तक सिमटा हुआ है। वर्तमान स्थिति में कितने लोगों द्वारा एनओसी लेने के बाद अपने-अपने भवनों में यह सिस्टम बनवाया है इसका रिकार्ड भी पालिका के पास मौजूद नहीं है। अफसरों का कहना है कि हर साल का वार्षिक रिकार्ड खंगालना पड़ेगा और फिर सभी के घरों का सर्वे कराना होगा तभी जाकर वास्तविक डाटा सामने आएगा कि कितने लोगों ने अपने घर में यह सिस्टम बनाया है और कितने घरों में नहीं बनाया गया।
एनओसी देने के बाद झांकते तक नहीं
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के लिए शासन तो पहले से ही काफी जोर दे रही है मगर जिनके कंधों में यह जिम्मेदारी सौंपी गई है वे ही लापरवाही बरत रहे हैं। नियमानुसार भवन एनओसी देने के बाद सालभर के भीतर अगर भवन मालिक के द्वारा अमानत राशि वापस लेने आवेदन नहीं किया जाता तो संबंधित इंजीनियर को भौतिक सत्यापन करना होता है लेकिन ऐसा होता नहीं। दूसरी ओर अमानत राशि भी १५ से २० हजार रुपए तक होने भी भवन मालिक ध्यान नहीं देता। जिसके चलते अमानत राशि पालिका के खाते में पड़ी रहती है। शहर में धड़ल्ले से मकान और कॉलोनियां बन रही है जहां इन नियमों को कागजों तक ही दफना दिया जा रहा है।
राशि राजसात की प्रक्रिया भी ठंडे बस्ते में
बता दें चार साल पहले शासन ने इसे लेकर गंभीरता बरतने कहा था तब जांजगीर-नैला नपा के तात्कालिन उपअभियंता डीएल सिदार द्वारा सात सालों से रिकार्ड खंगाला गया था जिसमें वर्ष २०११-१२ से लेकर १७-१८ तक शहर में १३५ ऐसे भवन मालिक सामने आए थे जिन्होंने एनओसी लेने के सालों बाद भी सिस्टम नहीं बनवाया था। १३५ के ७ लाख १५ हजार अमानत राशि जमा थी। सभी को नोटिस जारी किया गया था कि अगर वे सिस्टम नहीं बनाएंगे तो नपा अमानत राशि राजसात कर खुद पैसे से सिस्टम लगाएगी और जितना अतिरिक्त खर्च आएगा, भवन मालिक से वसूल किया जाएगा। मगर मामला नोटिस तक ही सिमट गया। अधिकारी बदल गए और न राशि राजसात हुई और न ही किसी घर में सिस्टम बनवाया गया।
चार साल में ७ लाख से ५६ लाख पहुंच गया
चार साल पहले तो पालिका के खाते में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए जमा अमानत राशि मात्र ७ लाख १५ हजार रुपए जमा थी जो वर्तमान में अब बढ़कर ५६ लाख रुपए तक पहुंच गई है। क्योंकि पालिका से एनओसी इसी शर्त पर दी जा रही है कि मकान में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाएगा और अमानत राशि तभी वापस मिलेगी जब सिस्टम तैयार हो जाने के बाद पालिका में आकर सूचना देगा कि उसके मकान में सिस्टम बन गया है। भवन तो लोगों को बनाना है इसीलिए शर्त के चलते लोग मरता क्या न करता की तर्ज पर अमानत राशि तो जमा कर रहे हैं लेकिन सिस्टम नहीं बनवाने की स्थिति में अमानत राशि वापस पाने पालिका में क्लेम नहीं कर पा रहे। यही वजह है कि पालिका के खाते में अमानत राशि का आंकड़ा हर साल बढ़ते जा रहा है।
&नए भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाया अनिवार्य किया गया है। इसी शर्त पर ही भवन एनओसी जारी की जाती है। वर्तमान में ५६ लाख रुपए अमानत राशि जमा है। कितने घरों में सिस्टम बना है और राशि वापस हुई है इसके लिए वार्षिक रिकार्ड खंगालना पड़ेगा व घरों में सर्वे कराना होगा तभी वास्तविक स्थिति पता चलेगी। कई लोग जानकारी नहीं होने से बनवाने के बाद भी अमानत राशि वापस नहीं लेते जिसके चलते राशि खाते में पड़ी रह जाती है।
चंदन शर्मा, सीएमओ