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जांजगीर डीईओ का हुआ स्थानांतरण, 10 माह ही रहे पदस्थ

जांजगीर-चांपा डीईओ एचआर सोम का शासन ने स्थानांतरण कर दिया है। उन्हें संयुक्त संचालक बस्तर संभाग बनाकर भेजा गया है। जांजगीर-चांपा डीईओ के रुप में उनका कार्यकाल महज १० माह का ही रहा। १३ अक्टूबर २०२२ को उन्होंने जांजगीर-चांपा डीईओ का कार्यभार संभाला था और १६ अगस्त २०२३ को वे रिलीव हो गए।

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जांजगीर डीईओ का हुआ स्थानांतरण, 10 माह ही रहे पदस्थ

जांजगीर डीईओ का हुआ स्थानांतरण, 10 माह ही रहे पदस्थ

जांजगीर-चांपा. जांजगीर-चांपा डीईओ एचआर सोम का शासन ने स्थानांतरण कर दिया है। उन्हें संयुक्त संचालक बस्तर संभाग बनाकर भेजा गया है। जांजगीर-चांपा डीईओ के रुप में उनका कार्यकाल महज १० माह का ही रहा। १३ अगस्त २०२२ को उन्होंने जांजगीर-चांपा डीईओ का कार्यभार संभाला था और १६ अगस्त २०२३ को वे रिलीव हो गए। १० माह के कार्यकाल के दौरान उनके ही दफ्तर का पूरा अमला उन्हें खिलाफ हो गया था और लंबी चौड़ी शिकायत भी हुई थी। दस माह के ही अल्प समय में स्थानांतरण के पीछे वजह इस शिकायतों को भी बताया जा रहा है। हालांकि शासन ने उन्हें प्रमोशन देते हुए संयुक्त संचालक बनाकर भेजा है। ऐसे में दफ्तर में कुछ कर्मचारियों में इसको लेकर नाराजगी भी है। गौरतलब है कि जांजगीर-चांपा डीईओ एचआर सोम का शासन ने बस्तर संभाग में स्थानांतरण कर दिया है। उन्हें कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बस्तर में संयुक्त संचालक बनाकर भेजा गया है। वहीं भारती वर्मा को जांजगीर-चांपा डीईओ बनाकर भेजा गया है जिन्होंने अभी ज्वाइन नहीं किया है। इधर जांजगीर डीईओ एचआर सोम बुधवार १६ अगस्त को जांजगीर डीईओ का प्रभार सौंपकर रिलीव भी हो गए। उनका कार्यकाल महज १० माह ही रहा।
पूरा अमला ही हो गया था खिलाफ....
बता दें, जांजगीर डीईओ पर अधिनस्थ कर्मचारियों पर दुव्र्यव्हार करने का आरोप लगाते हुए उनके ही दफ्तर का पूरा अमला उनके खिलाफ हो गया था और लंबी-चौड़ी शिकायत शासन तक हुई थी। इस मामले में कई दिनों तक जांच भी चली थी और डीईओ कार्यालय के लगभग सारे अधिकारी-कर्मचारियों को जेडी आफिस तलब किया गया था। जहां लगातार तीन-चार दिनों तक यहां से अधिकारी-कर्मचारियों को वहां जाकर बयान देने का सिलसिला चला था।
सीनियर के बजाए जूनियर को चार्ज....
बताया जा रहा है कि १५ अगस्त को शासकीय अवकाश होने के बाद भी कार्यमुक्त होने इतनी हड़बड़ी नजर आई कि सारी कागजी कार्रवाई उसी दिन हो गई थी और १६ अगस्त को दफ्तर खुलते ही पहला काम प्रभार सौंपने का ही हुआ। उनके द्वारा जांजगीर जिलाशिक्षाधिकारी कार्यालय में पदस्थ नोडल अधिकारी (विधि ) दिनेश कुमार राठौर को डीईओ को प्रभार देकर यहां से कार्यमुक्त हो गए। नियम के मुताबिक डाइट के प्रिंसीपल या सीनियर एडीपीओ को चार्ज दिया जाना चाहिए था। बताया जा रहा है कि जिन्हें प्रभार सौंपा गया है उन्हें शासन के तहत खुद यहां अटैच में पदस्थ हंै।