कई धर्म शास्त्रों में ही उल्लेख है कि साल में साढ़े तीन स्वयंसिद्ध मुहूर्त हैं, जिसमें अक्षय तृतीया शामिल है। साढ़े तीन स्वयं सिद्धमुहूर्त में पहला वासन्ती नवरात्र का पहला दिन नव संवत्सर आरंभ दिवस, दूसरा बैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया, तीसरा आश्विन शुक्ल दशमी यानी विजयादशमी और चौथा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा ये चार मुहूर्त स्वयं सिद्ध मुहूर्त माने जाते हैं। इनमें से प्रथम तीन मूहूर्त पूर्ण एवं चतुर्थ अद्र्धबली होने से इन्हें साढ़े तीन मुहूर्त कहते हैं। यह साढ़े तीन मुहूर्त स्वयं सिद्ध और अक्षय मुहूर्त हैं।