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अभिजीत मुहूर्त को लेकर पंडितों में मतभेद

वैदिक मान्यता के अनुसार किसी भी ग्रह के अस्त होने से लेकर उसके उदय तक के महीनों में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।

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Piyushkant Chaturvedi

May 03, 2016

Differences over Pandit

the auspicious Abhijit Differences over Pandit

जांजगीर-चांपा.
इस साल मई-जून के महीने में विवाह नहीं होंगे। दरअसल, शनिवार 30 अप्रैल से पश्चिम दिशा में शुक्र अस्त हो गया है। वैदिक मान्यता के अनुसार किसी भी ग्रह के अस्त होने से लेकर उसके उदय तक के महीनों में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। इस मान्यता के चलते अक्षय तृतीया के अभिजीत मुहूर्त में शादी को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।इस बार अक्षय तृतीया में विवाह को लेकर भी भ्रम की स्थिति है। कुछ पंडित अक्षय मुहूर्त होने के कारण उस दिन विवाह के पक्ष में हैं तो कुछ लोग अक्षय मुहूर्त के बाद शुक्र अस्त के कारण मांगलिक कार्यों में बाधा मान रहे हैं।


शहर के ज्योतिषि पंडित अनिल तिवारी का कहना है कि शास्त्रों में उल्लेख है कि वर्ष का दोष श्रेष्ठ मास हर लेता है। मास का दोष श्रेष्ठ दिन, दिन का दोष लग्न तथा लग्न का दोष श्रेष्ठ मुहूर्त हर लेता है। अक्षय तृतीया के मुहूर्त को श्रेष्ठ नहीं, बल्कि सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसलिए अक्ती के दिन शादी शुभाशुभ माना गया है।


कई धर्म शास्त्रों में ही उल्लेख है कि साल में साढ़े तीन स्वयंसिद्ध मुहूर्त हैं, जिसमें अक्षय तृतीया शामिल है। साढ़े तीन स्वयं सिद्धमुहूर्त में पहला वासन्ती नवरात्र का पहला दिन नव संवत्सर आरंभ दिवस, दूसरा बैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया, तीसरा आश्विन शुक्ल दशमी यानी विजयादशमी और चौथा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा ये चार मुहूर्त स्वयं सिद्ध मुहूर्त माने जाते हैं। इनमें से प्रथम तीन मूहूर्त पूर्ण एवं चतुर्थ अद्र्धबली होने से इन्हें साढ़े तीन मुहूर्त कहते हैं। यह साढ़े तीन मुहूर्त स्वयं सिद्ध और अक्षय मुहूर्त हैं।


इनमें लोगों को किसी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि, इष्टबल शुद्धि, षडबल शुद्धि आदि देखने की आवश्यकता नहीं रहती है। रही बात इस मुहूर्त की अवधि मे ग्रहों के अस्त होने की तो उक्त अक्षन्न मुहूर्त मे तीन ग्रह जो मुहूर्त निर्णय के आधार स्तम्भ माने जाते हैं। गुरू, शुक्र तथा शनि के अस्त होने के बाद भी पूज्य और सर्वथा ग्राह्य है।


मैत्राण्योपनिषद, वाजसनेयी संहिता, अथर्ववेद आदि अनेक ग्रंथों में भी इस मुहूर्त की सर्व व्यापकता को स्वीकारा एवं सराहा गया है। इस मुहूर्त में सभी दोषो का शमन हो जाता है। कोई भी मांगलिक और दैवीय कार्य वर्जित नहीं है। इस वजह से अक्षय तृतीया पर विवाह होगा।

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