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हर चौथे बच्चे की डिलीवरी सिजेरियन

अस्पतालों में डिलीवरी होने वाला हर चौथा बच्चा सिजेरियन पैदा हो रहा है। एक ओर जहां निजी अस्पतालों में गर्भवती प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा से बचने के लिए सिजेरियन डिलीवरी करवा रहीं हैं

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Piyushkant Chaturvedi

Aug 23, 2016

cesarean delivery

Every fourth child cesarean delivery

जांजगीर-चांपा.
अस्पतालों में डिलीवरी होने वाला हर चौथा बच्चा सिजेरियन पैदा हो रहा है। एक ओर जहां निजी अस्पतालों में गर्भवती प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा से बचने के लिए सिजेरियन डिलीवरी करवा रहीं हैं तो वहीं ग्रामीण अंचल की प्रसूताएं खानपान में लापरवाही व अन्य कारणों से सिजेरियन से बच्चों को जन्म दे रहीं हैं। अलबत्ता, सिजेरियन से डिलीवरी का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।


महानगरों की तर्ज पर अब छोटे शहरों में डॉक्टरों के बताए संभावित तिथि के आगे-पीछे मनचाहे तारीख में महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी करा रही हैं। शासकीय अस्पतालों की तुलना निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी की संख्या दोगुनी है। यहां पैदा होने वाला हर चौथा बच्चा सिजेरियन डिलेवरी यानी आपरेशन से जन्म ले रहा है। हालांकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इसकी संख्या कम है। क्यों कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर किसी तरह का रिस्क नहीं लेते और प्रसूता को सीधे जिला अस्पताल भेज देते हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बलौदा बम्हनीडीह, मालखरौदा, पामगढ़ में एक भी सिजेरियन के केस नहीं पहुंचे हैं। वहीं जिला अस्पताल में यह आंकड़ा 25 फीसदी तक पहुंच गया है। जिला अस्पताल में 957 के अनुपात में 210 शिशु सिजेरियन से हुए हैं। इसी तरह छह माह के भीतर 385 डिलीवरी में 73 सिजेरियन आपरेशन से शिशु जन्म लिया है।


कब है जरूरी

जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. ममता जगत के मुताबिक, छोटे कद वाली महिलाओं के कूल्हे की हड्डी छोटी होने से बच्चा सामान्य तरीके नहीं हो पाता। ऐसी अधिकांश महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी करानी पड़ती है। इसके अलावा ट्यूमर, रक्त स्त्राव ज्यादा, बच्चे की धड़कन कम होना, गर्भवती का बीपी बढऩा, बच्चे का आड़ा तिरछा होना, महिलाओं की उम्र ज्यादा होना, कई बार दवाओं से बच्चेदानी का मुंह खुला होना इसके कारण गर्भवती की सिजेरियन करना जरूरी हो जाता है। इसके अलावा जब बच्चा मल मूत्र पेट में ही कर दे तो इसे मिकोनियम कहते हैं, इस स्थिति में तत्काल आपरेशन करना पड़ता है। ताकि बच्चे की जान बचाई जा सके।


यह भी कारण

पहला बच्चा सिजेरियन हो तो दूसरा बच्चे में इसकी संभावना बढ़ जाती है। दूसरी बार प्रसव पीड़ा के दौरान टाके फटने का डर रहता है, लेकिन जरूरी नहीं कि पहला अप्राकृतिक हो तो दूसरा सामान्य नहीं हो सकता।

संजय राठौर

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