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दुष्कर्म-FIR, समझौता और सजा…पत्नी की जगह बेटी से शारीरिक संबंध बनाने लगा पिता, 5 शर्मसार करने वाले मामले

Delhi High Court : जब घर के भीतर ही बेटी सुरक्षित नहीं रहती, तो बाहर की दुनिया उससे और ज्यादा असुरक्षित लगने लगती है। इससे न सिर्फ पीड़िता का जीवन प्रभावित होता है, बल्कि समाज में रिश्तों की पवित्रता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

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Delhi High Court upholds sentence of father for raping 14-year-old daughter

Delhi High Court : दिल्ली हाईकोर्ट ने एक रेप मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी की उम्र कैद की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया है। दरअसल, कलयुगी पिता ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया था। आरोप सिद्ध होने के बाद से उसे कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी। आरोपी की तरफ से सजा कम करने के लिए याचिका दायर की गई थी, लेकिन कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि एक पिता का काम बेटियों की हिफाजत करना होता है न कि उनके साथ गंदी हरकत करना। वहीं, ऐसे देश में कई मामले सामने आए हैं जो सवाल समाज और संस्कृति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

आपको बता दें कि इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने दोषी करार देने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार और आरोपी के द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की कि पीड़िता और उसकी मां भले ही ट्रायल के दौरान बदल गई थीं, लेकिन इस आधार पर किसी आरोप सिद्ध आरोपी की सजा कम नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि हो सकता है कि किसी रिश्तेदार या अन्य व्यक्तियों के द्वारा दबाव बनाया गया हो।

घटना के समय 14 साल की थी बेटी

मिली जानकारी के अनुसार, जब कलयुगी पिता ने अपनी बेटी के साथ घिनौनी हरकत की थी, उस समय वह बच्ची 14 साल की थी। आरोप लगने के बाद बच्ची का मेडिकल कराया गया और पीठ के पास जब भ्रूण के डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट पहुंची तो कोर्ट ने माना कि समाज में कोई भी पिता अपनी बेटी के साथ ऐसी हरकत करता है तो यह किसी भयानक अपराध से कम नहीं है। वहीं, इस मामले में पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कोर्ट रिकॉर्ड पर आए वैज्ञानिक सुबूतों को पूरी तरह से अनदेखा करना उचित नहीं होगा, इसलिए आरोपी की सजा में किसी भी प्रकार से समझौता नहीं किया जा सकता है।

रात को सोते समय पिता ने किया था दुष्कर्म

ट्रायल कोर्ट ने जुलाई 2025 में आरोपी को भारतीय दंड संहिता और पोक्सो अधिनियम के तहत दुष्कर्म, गंभीर यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी का दोषी ठहराया था। इसके बाद अगस्त 2025 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। एफआईआर के अनुसार, पीड़िता उस समय तीन महीने की गर्भवती थी और अपनी मां के साथ थाने पहुंची थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसके पिता ने रात में सोते समय उसके साथ दुष्कर्म किया था।

2. मां से शादी बेटी से संबंध

गौरतलब है कि इससे पहले एक बॉम्बे हाई कोर्ट में भी एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसमें एक मां ने अपने पति पर आरोप लगाया कि उसने उसकी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया है। एफआईआर के मुताबिक पीड़ित मां ने 2014 में आरोपी से दूसरी शादी की थी। मां के आरोप के अनुसार, 47 साल के पति ने नाबालिग बेटी से 5 बार रेप किया था। अप्रैल 2025 में छठी बार यौन शोषण की कोशिश के बाद लड़की ने साहस जुटाकर अपनी मां को पूरी घटना बताई। इसके तुरंत बाद मां अपनी बेटी को लेकर मायके चली गई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    3. सौतेले पिता ने 6 लोगों के साथ बेटी से किया गैंगरेप

    यह मामला राजस्थान का है। यहां पर एक साल 2025 में एक हैवान सौतेले पिता ने 6 लोगों के साथ मिलकर अपनी बेटी से रेप किया था। लड़की ने अपने सौतेले पिता की करतूत के बारे में जब अपनी मां को बताया तो उसने भी ध्यान नहीं दिया, बल्कि उसे ही चुप रहने को कहा। पीड़ित बच्ची ने बताया कि सौतेले पिता और उसके एक दोस्त ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया और उसके बाद 4 और लड़कों ने भी किया।

      4.बेटी से पिता ने 5 साल तक किया रेप

      यह मामला 7 महीने पुराना है और बिहार के भागलपुर का है। यहां पर एक नाबालिग लड़की ने अपने नेवी से रिटायर्ड पिता पर आरोप लगाया कि वह जब पांचवीं में पढ़ती थी तब से उसके साथ गंदी हरकतें कर रहे हैं। पिता से परेशान होकर 15 साल की पीड़िता अपने नाना-नानी के पास पहुंची और अपने पिता के करतूतों के बारे में बताया। फिर नाना-नानी ने पुलिस में इस घटना को लेकर शिकायत दर्ज कराई।

      पिता का काम बेटी की रक्षा करना होता है

      पिता को समाज में बेटी का सबसे बड़ा संरक्षक माना जाता है। बेटी अपने पिता पर आंख मूंदकर भरोसा करती है, क्योंकि वही उसके लिए सुरक्षा, सहारा और सम्मान का प्रतीक होता है। लेकिन जब किसी पिता या पिता जैसे रिश्ते से जुड़ा व्यक्ति ही बेटी पर गलत नजर रखे, तो यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे मामलों से बेटियों का भरोसा टूटता है, उनका मानसिक और भावनात्मक विकास प्रभावित होता है, और समाज में डर व असुरक्षा का माहौल बनता है।