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मड़वा पॉवर प्लांट: कभी घाटे में चल रही थी कंपनी अब 82 फीसदी ग्रोथ में हो रहा उत्पादन

अटल बिहारी बाजपेयी ताप विद्युत गृह मड़वा जांजगीर कभी भारी नुकसान में चल रही थी, लेकिन अब पर्याप्त कोयला व जरूरी संसाधन उपलब्ध होने से कंपनी 82 फीसदी फायदे में चल रही है।

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मड़वा पॉवर प्लांट: कभी घाटे में चल रही थी कंपनी अब 82 फीसदी ग्रोथ में हो रहा उत्पादन

मड़वा पॉवर प्लांट: कभी घाटे में चल रही थी कंपनी अब 82 फीसदी ग्रोथ में हो रहा उत्पादन

यह बातें अटल बिहारी बाजपेयी ताप विद्युत गृह मड़वा के कार्यपालक निदेशक एसके बंजारा ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए कही। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में विद्युत उत्पादन की दिशा में और बेहतर करने जा रही है। ताकि उत्पादन भी और बढ़े। कंपनी में विस्तार भी किया जाएगा। कर्मचारियों की भी भर्ती की जाएगी। हालांकि भर्ती में भूविस्थापितों को पहली वरीयता क्रम में भर्ती की जाएगी। उन्होंने पत्रकारों के सामने कहा कि यह कंपनी पहले बेहद नुकसान में चल रही थी। भूविस्थापित कर्मचारियों द्वारा लगातार हड़ताल किया जा रहा था। इससे उत्पादन पर खासा फर्क पड़ रहा था। दो साल पहले यहां व्यापक तौर पर तोडफ़ोड़ भी हुई थी। इससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था। इतना ही नहीं शुरुआती दौर में यह कंपनी बेचने की स्थिति में भी आ गई थी। क्योंकि खर्च के हिसाब से उत्पादन न होने से कंपनी की माली हालत खराब हो चुकी थी। इससे उबरकर कंपनी बेहतर स्थिति में खड़ी है। कंपनी के संचालन के लिए पर्याप्त कोयला भी है। मौजूदा हालात में 4 लाख टन से अधिक कोयला सुरक्षित रखा है। इतना कोयला चार महीने तक चल सकती है। सुखद समाचार यह है कि यह कंपनी अब बिजली उत्पादन में प्रदेश में नंबर वन के पायदान पर है।


सीएसआर मद की राशि में पेंच


सीएसआर मद की राशि को लेकर आसपास के गांव के लोगों में नाराजगी रहती है, जिसे दूर किया जाता है। सीएसआर मद की राशि भी राज्य शासन के मार्गदर्शन में रिलीज किया जाता है। हालांकि कलेक्टर के निर्देशन में यह राशि जारी होती है। सामाजिक सरोकार के तहत बीते वर्ष जांजगीर के खड़पड़ी तादात की गहरीकरण के लिए तकरीबन 6 लाख रुपए जारी की गई थी। हालांकि इसके भुगतान में थोड़ा पेंच फंस गया था। बड़ी मुश्किल से इसका भुगतान हो पाया था। वहीं आसपास के गांवों में भी सीएसआर मद के तहत विकास कार्य किए जाते हैं।