
प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू, सेंध व खांडवा जलाशय बने आकर्षण का केंद्र
रायपुर. हर साल की तरह इस बार भी ठंड शुरू होते ही जिले व उसके आसपास के क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। नया रायपुर स्थित सेंध जलाशय और जंगल सफाई के अंदर बने जलाशय में पक्षियों ने अपने बसेरा बनाना शुरू कर दिया है। इन्हें देखने पर्यटक पहुंचने भी लगे हैं। प्रवासी पक्षियों के दिखाने के लिए नया रायपुर के सेंध जलाशय में बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। इसमें स्कूली बच्चे यहां आकर प्रवासी पक्षियों और उनकी प्रजाति के बारे में जानकारी लेते हैं।
वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इन जलाशयों में नीलकंठ (इंडियन रोलर), मैना (स्टार्लिंग), पत्रिंगा (ग्रीन बी ईटर), कोतवाल (ब्लैक ड्रोंगो), जल कौआ (कोर्मोरेंट) और कठफोड़वा (किंगफिशर) जैसे विभिन्न पक्षियों के पक्षी देखने को मिल जाते हैं। वन विभाग के अधिकारियों की माने तो भारत में लगभग 1500 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। इनमें से करीब 1250 मुख्य प्रजातियां हैं व अन्य उप प्रजातियां हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में तकरीबन 500 प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। इनमें 70-80 प्रजातियां ऐसी हैं जो ठंड के मौसम में दूसरे देशों से कई हजार किलोमीटर लंबा सफर करके हर साल ठंड के मौसम में आती हैं। इनमें से कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों को सेंध तालाब में देखा जा सकता है।
जंगल सफारी की बढ़ाते हैं शोभा
एक नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ राज्य में बनी मानव निर्मित जंगल सफाई राज्य की पहचान बन चुकी है। प्राकृतिक संसाधनों की वजह से पूरे राज्य में कई प्रजाति के प्रवासी पक्षी यहां हर साल प्रवास पर आते हैं। इन जगहों में जंगल सफारी का नाम भी जुड़ चुका है। जंगल सफारी का पूरा क्षेत्र सुंदर जलाशय व हरे भरे हरे पेड़ पौधों से भरा है। यहां स्थित 'खांडवा जलाशय प्रवासी पक्षियों को खूब आकर्षित कर रहा है। यहां इनका आगमन भी शुरू हो गया है। इससे पर्यटक वन्य प्राणियों को देखने के साथ ही प्रवासी पक्षियों का लुत्फ भी उठा रहे हैं।
एक्सपर्ट व्यू
वन्य प्राणि एवं पक्षी विशेषज्ञ प्राण चड्ढा का कहना है कि छत्तीसगढ़ प्रवासी पक्षियों का हमेशा से अकर्षण का केंद्र रहा है। इस बार भी प्रवासी पक्षी साईबीरिया, तिब्बत, चीन और मध्य एसिया से आए हैं। इसमें सबसे अहम बात देखने को यह मिली है कि जो कई प्राजितयों की बतख आती थीं वह इस बार काफी कम संख्या में आईं हैं। इसका कारण है कि जलाशयों में अधिक जल भराव का होना। चड्ढा की माने तो बतख कम पानी वाले जलाशयों के किनारे बैठती हैं और उसमें डुबकी लगाकर पानी के अंदर की वनस्पति और मछलियों को खाती हैं। इस बार गहरा पानी होने से उन्हें डुबकी लगाने में दिक्कत होगी। सांस फूलने से वह अपने लिए पर्याप्त भोजन नहीं जुटा पाएंगी। शायद यही कारण है कि इस बार उनकी संख्या कम देखने को मिली है। प्रवासी पक्षियों में 70 प्रतिशत संख्या बतख की प्रजातियों की होती है और शेष में अन्य प्रजातियां होती हैं।
वर्जन-
जंगल सफाई में प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो चुका है। ये पर्यटक के आकर्षण का केंद्र भी बने हैं। यहां के जलाशय में पानी की पर्याप्त उपलब्धता रहने से यह प्रवासी पक्षियों के आकर्षण का केंद्र है।
-अतुल शुक्ला, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ
Published on:
10 Nov 2019 06:17 pm
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