23 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भवन निर्माण कराकर मिशन ने सालों से लटकाया 1.17 करोड़ का बजट

सालों से फांके में दिन गुजार रहे निर्माण एजेंसी

2 min read
Google source verification
सालों से फांके में दिन गुजार रहे निर्माण एजेंसी

सालों से फांके में दिन गुजार रहे निर्माण एजेंसी

जांजगीर-चांपा.राजीव गांधी शिक्षा मिशन ने विकास कार्य के तहत स्कूलों में अहाता निर्माण प्रधान पाठक कक्ष,अतिरिक्त कक्ष, मिडिल स्कूल भवन व संकुल भवन के लिए करोड़ो रुपए की लागत से निर्माण तो कराया लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी निर्माण की राशि 1.17 करोड़ चुक्ता नहीं कर रही है।

निर्माण एजेंसियों की दफ्तर में चक्कर काटते पांव घिस गए, लेकिन सरकार उनकी सुन नहीं रही। वहीं विभागीय अधिक मिशन संचालक को पत्राचार करते थक चुके, लेकिन सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है।


विकास कार्य के नाम पर सरकार बड़े -बड़े दावे जरूर करती है लेकिन तह तक जाएं तो आपको जरूर दावों की ढोल में पोल दिखाई देगा। कुछ इसी तरह का हाल राजीव गांधी शिक्षा मिशन का है। वर्ष 2009 में मिशन ने स्कूलों में अहाता निर्माण, प्रधान पाठक कक्ष, अतिरिक्त कक्ष, मिडिल स्कूल भवन व संकुल भवन के लिए करोड़ो रुपए स्वीकृत की थी। जिले में ऐसे 47 कार्य स्वीकृत किए थे। जिसमें तकरीबन 50 करोड़ की राशि स्वीकृत की थी। निर्माण एजेंसी के रूप में स्थानीय शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा स्थानीय सरपंचों ने भी विकास कार्य कराया था। एजेंसी ने तो काम कर दिया,

लेकिन सरकार ने किस्तों में राशि जारी करते हुए भुगतान के लिए हीलाहवाला कर रही है। 50 करोड़ के बजट में सात साल बाद भी एक करोड़ 17 लाख रुपए का बजट रोक दी है। जिसके चलते निर्माण एजेंसी को फांके में दिन बिताना पड़ रहा है। एजेंसी के संचालक मिशन कार्यालय का चक्कर काटते थक जा रहे लेकिन उन्हें भुगतान नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते उनकी माली हालत खराब है।

राशि सालों से अटकी
निर्माण कार्य की राशि सालों से अटकी हुई है। इसके लिए कलेक्टर के माध्यम से मिशन संचालक को पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन राशि आ नहीं रही है। जिसके चलते निर्माण एजेंसी परेशान है।
-संतोष कश्यप, डीएमसी