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Navratri 2024: देश का इकलौता मंदिर… सात समंदर पार के लोग जलवा रहे ज्योति कलश, जानिए क्या है इसकी मान्यता?

Navratri 2024: लौदा-जांजगीर मार्ग पर जांजगीर से 15 किमी दूर ग्राम हरदी में क्षेत्र का प्रसिद्ध मंदिर महामाया मंदिर है। सात समुंदर पार कर कई श्रद्धालुओं यहां ज्योत जलवा रहे है।

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Navratri 2024

Navratri 2024: जांजगीर चांपा जिले के महामाया मंदिर हरदी की ख्याति देश के महानगरों से लेकर विदेश तक है। यहां विदेशी भक्त भी मां की ज्योति कलश जलवा रहे हैं। अमेरिका का एक भक्त ऐसा भी है जो आजीवन ज्योति कलश जलवा रहा है। यहां मान्यता के अनुसार सप्तमी रात को मंदिर में मां दुर्गा आती है। इससे यहां इस दिन भक्तों का हुजुम उमड़ पड़ता है। कई भक्त तो लोट मारते हुए भी यहां पहुंचते हैं।

नवरात्र पर्व पर पूरा जिला भक्तिमय हो गया है। सभी दिशाओं में दिनभर माता जसगीत व जयकारे की गूंज सुनाई दे रही है। गांव-गांव में महिला पुरूषों की टोली मांदर की थाप पर माता जसगीत में लीन हैं। बलौदा-जांजगीर मार्ग पर जांजगीर से 15 किमी दूर ग्राम हरदी में क्षेत्र का प्रसिद्ध मंदिर महामाया मंदिर है। यहां क्वांर तथा चैत्र नवरात्र में दूर-दूर से हजारों की संया में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित कराते हैं। इनकी याति दूर-दूर तक फैली हुई है। इस मंदिर में महानगर सहित विदेश से ज्योति जलाने का संकल्प भक्तों ने लिया।

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महामाया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुधराम ने बताया कि यहां इस बार महानगर दिल्ली के अलावा विदेश से भी भक्त ज्योति कलश जलवा रहे हैं। इसमें अमेरिका से दो लोग शामिल हैं। जिसमें एक आजीवन ज्योति कलश जलवा रहा हैं। इस मंदिर की याति दूर-दूर तक फैली हुई है। यहां महामाया को नीम पेड़ के नीचे स्थापित है। यहां शाम के समय महाआरती की जाती है। जिसमें हर रोज बड़ी संया में श्रद्धालु पहुंचते हैं। समय के साथ मां महामाया की याति बढ़ने लगी।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां की पुरानी मान्यता है कि सप्तमी की रात शेर पर सवार होकर मां महामाया मंदिर में आती हैं। रात 12 बजे विशेष पूजा के बाद मंदिर के पट पूरी तरह बंद कर दिया जाता है। इस दौरान मंदिर के अंदर पात्र में पंचमेवा और हलुवा के साथ ही लौंग, इलायची व अन्य भोग की सामग्री गिनकर मां को अर्पित करने रखी जाती है। गर्भगृह में आटे का छिड़काव किया जाता है।

एक घंटे के बाद भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर का पट पुन: खोल दिया जाता है। मां अपने आने का अहसास भक्तों को कराती है। शेर के पंजे का निशान छिड़के गए आटे पर स्पष्ट नजर आता हैं। पात्र में रखे गए प्रसाद में से कोई चीज मां ग्रहण करती है। मंदिर का पट खुलने के बाद जब पात्र में रखी प्रसाद की सामग्री की गिनती की जाती है तो कोई एक चीज स्थान से गायब मिलती है।

विदेशों से इन भक्तों ने जलवाए ज्योति कलश

यहां घृत जवा 86, तेल जवा 272, घृत ज्योति 123, तेल ज्योति 1632 ज्योति कलश प्रज्जलित किए गए हैं। जिसमें महानगर दिल्ली व मुंबई के अलावा अमेरिका, कुवैत सहित अन्य प्रदेश शामिल हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया से आशी अंशिता पिता केके श्रीवास, अमेरिका के अल्फारेट्टा से अंजली साहू पिता गोपेश साहू व कुवैत के इनेश, दिव्यांश पिता शब्दशरण साहू शामिल हैं।