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वीडियो में देखिए इस कॉलोनी की दुर्दशा, मेंटेनेंस के नाम पर क्या कर रहे हैं जिम्मेदार अफसर, पढि़ए खबर…

- कॉलोनी के मेंटेनेंस के नाम पर जवाबदार अफसरों द्वारा लाखों का कर दिया जाता है वारान्यारा

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वीडियो में देखिए इस कॉलोनी की दुर्दशा, मेंटेनेंस के नाम पर क्या कर रहे हैं जिम्मेदार अफसर, पढि़ए खबर...

जांजगीर-चांपा. शासकीय विभागों के अधिकारी व कर्मचारियों के लिए बीटीआई के पास स्थित ब्लॉक कॉलोनी की हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है। ब्लॉक कॉलोनी के मेंटेनेंस का जिम्मा एसडीओ अमित कश्यप का है, लेकिन कॉलोनीवासियों की मानें तो जवाबदार अफसर बदहाल कॉलोनी की स्थिति को लेकर गंभीर नहीं है।

कॉलोनीवासियों का कहना है कि कॉलोनी के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के एसडीओ अमित कश्यप को दे दिया गया है पर एसडीओ कॉलोनी की दुर्दशा को देखने तक की तकलीफ नहीं उठाते। इससे कॉलोनी की स्थिति बद से बदत्तर होते जा रही है। ब्लॉक कॉलोनी में छोटे तबके के कर्मचारियों के अलावा बड़े अधिकारी भी निवास करते है। कॉलोनी की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। इसके बाद भी कॉलोनी के मेंटेनेंस के नाम पर जवाबदार अफसरों द्वारा लाखों का वारान्यारा कर दिया जाता है। वहीं कॉलोनी की बदहाली इन अफसरों के कार्यशैली को लेकर कई तरह से सवाल दाग रहे हैं।

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कॉलोनीवासियों का कहना है कि कॉलोनी में न ही सड़क की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाता है और न ही यहां मूलभूत सुविधा को लेकर कवायद की जा रही है। इससे लोगों को असुविधाओं के बीच गुजर करना पड़ रहा है। आलम यह है कि कॉलोनी में गंदे पानी की निकासी के लिए विभाग द्वारा नाली की व्यवस्था पर भी ध्यान नहीं दिया गया है। इससे कॉलोनीवासी गंदे पानी की निकासी के लिए नाली निर्माण होने की बाट जोह रहे हैं। ऐसे में कॉलोनी में निवासरत लोगों में धीरे-धीरे आक्रोश पनप रहा है।

कॉलोनी की बदहाली को लेकर जवाबदार नुमांइदों के द्वारा पहल नहीं करने पर कॉलोनी में बने भवन खंडहर में तब्दील होते जा रहे है। लोगों की मानें तो कॉलोनी के मेंटेनेंस को लेकर हर साल फंड आता है, लेकिन आज पर्यंत कॉलोनी की दुर्दशा को सुधारने अफसरों ने मेंटेनेंस के नाम पर औपचारिकता पूरी करना भी मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में इन जवाबदारों द्वारा कॉलोनी के लिए पहल करने की सोचना बेमानी साबित होगी।

खाली होने से बिगड़ रही भवनों की दशा
कॉलोनी में खाली पड़े ऐसे कई भवन है जिसे रहने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है पर विभाग द्वारा भवन एलाट करने में कोताही बरतने से उपयोगी भवनों की दशा बिगड़ते जा रही है। खाली पड़े भवनों को अफसरों द्वारा एलाट नहीं किया जा रहा है। इससे जहां अधिकारी-कर्मचारी मकान को लेकर भटक रहे हैं तो वहीं खाली पड़े भवन असमय खंडहर होते जा रहे है।