
dhan ki lagi fasal
कृषि विभाग व जिला प्रशासन को खरीफ के पहले से फसल परिवर्तन को लेकर चर्चा करनी चाहिए, ताकी किसानों सही समय में फसल लगाने से फायदा हो सका।
छत्तीसगढ़ को धान कटोरा का कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा धान का बंफर उत्पादन जांजगीर-चांपा जिले में ही होता है। इसके बावजूद यहां के किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है। किसान सही समय में बोनी नहीं कर पाते हंै, इसलिए नुकसान उठाना पड़ता है और रबी फसल में भी किसान केवल धान का फसल ही ले पाते है। इसके पीछे जिला प्रशासन व किसानों के बीच सामंजस्य की कमी है। जिला प्रशासन खरीफ की बोनी के समय ही रबी की तैयारी नहीं कर पाती है। अक्टूबर-नवंबर माह में रबी फसल की तैयारी शुरू की जाती है। जबकि इस माह में बोनी का सही समय है। ये बात हम नहीं बल्कि इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय कह रही है। रबी फसल में बोनी समय पर होने से ही किसानों को लाभ होगा। अन्यथा किसान लागत भी नहीं निकाल पाएगी। सही कार्ययोजना तैयार नहीं होने के कारण जिले के किसान एक फसल में ही अपनी गुजर-बसर करने को मजबूर हो गए है।
रबी फसल में बुआई का समय
कृषि विश्वविद्यालय के अनुशंसा के अनुसार चना, मटर, तिवरा, मसूर के बुआई का समय अक्टूबर-नवंबर और कटाई फरवरी-मार्च है। लेकिन जनवरी माह में नहर में पानी छोड़ा जाएगा तो फरवरी में किसान बोनी शुरू करेंगे। जबकि फरवरी में कटाई का समय है। इसलिए किसान को फायदा नहीं मिल पाता और रबी फसल लगाने जिले के अधिकांश किसान रूचि नहीं लेते।
किसान पलायन को मजबूर
कृषक चेतना मंच के जिला सहसंयोजक संदीप तिवारी ने बताया जिला प्रशासन द्वारा खरीफ के पहले ही रबी के लिए भी कार्ययोजना बनाना चाहिए। ताकी किसान अक्टूबर-नवंबर में रबी फसल की बोनी शुरू कर सके। जनवरी माह में बोनी शुरू करने से लेट हो जाने की वजह से अधिकांश किसान बुवाई नहीं कर पाते है। इसलिए जिले में बहुत ज्यादा संख्या में किसान पलायन कर जाते है। सही कार्ययोजना से बहुत हद तक जिले से पलायन रूक सकती है।
किसानों की खेत से दुबराज की खुशबू गायब
किसान अब अधिक उत्पादन व लाभ के चक्कर में उच्च क्वालिटी के धान फसल लगाने भूलते जा रहे है। पहले अधिकांश किसान एचएमटी, विष्णु भोग, जवा भूल, जीरा फूल, तुलसी मंजरी, दुबराज आदि उच्च क्वालिटी धान की फसल लगाते थे। अब जल्दी व बिना झंझट वाला स्वर्णा, हाईब्रिड पान जमुना, १०५३, ११५३, ११५६, महामाया पर उतर आए हैं। साथ ही खेतों के मेढ़ से राहर गायब हो गया। जबकि वर्तमान में पहले से साधन संसाधन भी बढ़ गया है। इस साल तिवरा को समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। समर्थन मूल्य ही घोषित करने से कुछ नहीं होगा।
Published on:
27 Nov 2023 09:41 pm
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