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खुश खबर : नेत्र रोग से पीडि़त मरीजों को अब नहीं काटना पड़ेगा निजी अस्पतालों का चक्कर, पढि़ए खबर…

- मोतियाबिंद के पांच हजार मरीजों को मिल सकेगा इलाज - पिछले दो साल से जिला अस्पताल में नहीं थे नेत्र रोग विशेषज्ञ

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खुश खबर : नेत्र रोग से पीडि़त मरीजों को अब नहीं काटना पड़ेगा निजी अस्पतालों का चक्कर, पढि़ए खबर...

जांजगीर.चांपा। जिला के नेत्र रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। अब जिला अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति हो गई है। अब जिले के नेत्र रोग से पीडि़त मरीजों को निजी अस्पतालों में भटकना नहीं पड़ेगा। जिला अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज राठौर ने पद भार ग्रहण कर लिया है। वे लगातार जिला अस्पताल में सेवा देना शुरू भी कर दिए हैं।

पिछले दो साल से नेत्र रोग के मरीजों को आंख से संबंधित परेशानी से जूझना पड़ रहा था। क्योंकि जिला अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कोर्राम व डॉ. नायडू के स्थानांतरण हो जाने के कारण यहां दो साल से पद रिक्त था। यहां नेत्र रोग सहायक के भरोसे अस्पताल था। काफी दिनों से नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की मांग की जा रही थी, लेकिन प्रशासन के पास कोई इंतजाम नहीं था।

बड़ी मुश्किल से हसौद पीएचसी में पदस्थ डॉ. मनोज राठौर का स्थानांतरण जिला अस्पताल किया गया। इसके बाद जिला अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ मिल पाया। अब जिले के नेत्र रोग से पीडि़त मरीज जिला अस्पताल में इलाज करा सकते हैं। डॉ. राठौर प्रतिदिन सुबह 8 से दोपहर दो बजे तक मरीजों की देख रेख करना शुरू कर दिए हैं।
पांच हजार पीडि़त हैं
बताया जा रहा है कि जिले में पांच हजार नेत्र रोग से पीडि़त मरीज हैं। किसी को मातियाबिंद की शिकायत है तो किसी को आंख से संबंधित कोई और परेशानी। आर्थिक तंगी या कोई अन्य कारणों से मरीज आंख का इलाज नहीं करा पा रहे थे। अब इन मरीजों को राहत मिल गई है। मरीज आसानी से जिला अस्पताल में इलाज करा सकते हैं।

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मिशन अस्पताल से करा रहे थे इलाज
अब तक जिला अस्पताल के मरीजों को मिशन अस्पताल चांपा रेफर किया जाता था। गौरतलब है कि जिला अस्पताल में हर रोज दर्जनों मरीज पहुंचते हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने से यहां के मरीजों को मिशन जाना पड़ता था या फिर निजी अस्पताल में शरण लेना पड़ता था। इसके चलते उन्हें आर्थिक परेशानी सामने आती थी। अब ऐसे मरीजों के लिए राहत मिलेगी।

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