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दो माह से भगवान भरोसे चल रहा अंचल का ये प्रसिद्ध अस्पताल, ड्यूटी को लेकर ड्रेसरों ने किया बवाल

नाराज महिला डॉक्टर ने अस्पताल का प्रभार ही छोड़ दिया। मामले की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।

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दो माह से भगवान भरोसे चल रहा अंचल का ये प्रसिद्ध अस्पताल, ड्यूटी को लेकर ड्रेसरों ने किया बवाल

जांजगीर-चांपा. अंचल के प्रसिद्ध बीडीएम अस्पताल की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। यह अस्पताल दो माह से बगैर प्रभारी के चल रहा है। इसकी प्रमुख वजह ड्रेसर की कमी को बताया जा रहा है। यहां मात्र दो ड्रेसर हैं, चिकित्सकों ने इन्हें 12-12 घंटे ड्यूटी करने को कहा, लेकिन ड्रेसर नहीं मानें। यहां तक उन्होंने चिकित्सकों का पत्र लेने से ही इंकार कर दिया। इससे नाराज महिला डॉक्टर ने अस्पताल का प्रभार ही छोड़ दिया। मामले की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। इसके बावजूद वो व्यवस्था बनाने ध्यान नहीं दे रहे हैं।

चांपा का बीडीएम अस्पताल कई मायनों से महत्वपूर्ण है। यहां चांपा के अलावा जैजैपुर, बम्हनीडीह, बिर्रा, सक्ती, बाराद्वार तक के कई मामले आते हैं। अस्पताल का प्रभार डॉ. अनिता श्रीवास संभाल रही थी, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही से आज अस्पताल का प्रभार किसी के हाथ में नहीं है।

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अस्पताल सूत्रों के मुताबिक इतने बड़े अस्पताल में मात्र दो ड्रेसर हैं। इन पर 12-12 घंटे ड्यूटी का जिम्मा है, लेकिन ड्रेसर मात्र 4-4 घंटे ड्यूटी करने की बात पर अड़े हैं। बताया जा रहा है कि अस्पताल के चिकित्सकों ने दो माह पहले ड्रेसरों को 12-12 घंटे ड्यूटी करने का निर्देश दिया, लेकिन वो नहीं मानें।

इस पर प्रभारी चिकित्सक ने उन्हें लिखित में यह पत्र दिया, तब वो पत्र लेने से ही इंकार कर दिया। इसका चिकित्सकों पर गहरा प्रभाव पड़ा। कर्मचारियों के अडिय़ल रवैये से चिकित्सकों में गहरी नाराजगी है। जानकारी के अनुसार डॉ. अनिता श्रीवास्तव ने अस्पताल के प्रभार से त्याग पत्र दे दिया, वहीं अन्य चिकित्सक अस्पताल का प्रभार लेने तैयार नहीं है। यही वजह है कि बीते दो माह से अस्पताल भगवान भरोसे संचालित है। दिलचस्प बात यह है कि पूरे मामले की सूचना सीएमएचओ को दे दी गई है। इसके बावजूद सीएमएचओ दो माह से पत्र को लेकर बैठे हैं। सीएमएचओ अस्पताल का व्यवस्था बनाने रुचि ही नहीं ले रहा है। इन सब विसंगतियों का खामियाजा अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

अस्पताल आए मरीजों का बुरा हाल
बीडीएम अस्पताल की व्यवस्था चरमराने का प्रभाव मरीजों पर पडऩे लगा है। आलम यह है कि अस्पताल में भर्ती मरीज का इलाज महज स्टाफ नर्स व वार्ड ब्वाय के भरोसे हो रहा है। हाल ही में सिवनी चांपा गांव का महेश राठौर और उसके परिवार के किसी को डायरिया हो गया था। वह बीडीएम अस्पताल में भर्ती था। महेश का कहना है कि 24 घंटे में एक बार भी किसी भी डॉक्टर ने उसे देखने नहीं आया। स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय ने ही इलाज किया। इसके पहले रात में कुछ मरीज आए थे, लेकिन कोई भी डॉक्टर अस्पताल में नहीं था।

-बीडीएम अस्पताल में दो ड्रेसर है। इन्हें 12-12 घंटे ड्यूटी करने को कहा गया। इस आशय का उन्हें पत्र भी दिया गया, लेकिन उन्होंने पत्र लेने से ही इंकार कर दिया। इससे नाराज होकर चिकित्सक ने प्रभार से इस्तीफा दे दिया। वहीं अन्य चिकित्सक प्रभार लेने तैयार नहीं। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है- डॉ. मनीष श्रीवास्तव, चिकित्सक, बीडीएम चांपा

-बीडीएम अस्पताल के प्रभार से त्याग पत्र दे देने से कुछ नहीं होता। यहां से इस्तीफे को मंजूर नहीं किया गया है। अस्पताल की जो भी समस्या है उसे दूर कर दिया जाएगा। साथ ही अस्पताल का संचालन उचित तरीके से किया जाएगा- डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ

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