26 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Video- निजी स्कूलों में पार्ट टाइम सेवा दे रहे हैं शिक्षाकर्मी, जानें एक विषय के पीछे कितना कमाते हैं ये

- सरकार की मानें तो शिक्षाकर्मियों को केवल अपने ही स्कूल के बच्चों के शिक्षा का स्तर बढ़ाना है और वे निजी स्कूलों में सेवा नहीं दे सकते
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जांजगीर चंपा

•

image

Shiv Singh

•

Updated: 12 Jul 2018, 6:00 PM IST

निजी स्कूलों में पार्ट टाइम सेवा दे रहे हैं शिक्षाकर्मी, जानें एक विषय के पीछे कितना कमाते हैं ये

निजी स्कूलों में पार्ट टाइम सेवा दे रहे हैं शिक्षाकर्मी, जानें एक विषय के पीछे कितना कमाते हैं ये

जांजगीर चांपा. शहर के अधिकांश प्राइवेट स्कूल शिक्षाकर्मियों के भरोसे संचालित हो रही है। अधिकांश शिक्षाकर्मी बतौर पार्ट टाइम जॉब निजी स्कूलों में सेवा दे रहे हैं। इसके एवज में उन्हें प्रत्येक सब्जेक्ट के पीछे तीन से चार हजार रुपए महीना मानदेय दिया जा रहा है। बहुत से शिक्षाकर्मी ऐसे हैं जो विषय के व्याख्याता हैं और सुबह शाम की पाली के आधार पर निजी स्कूलों में सेवा देते हैं।

यदि उनका सरकारी स्कूल में उनकी क्लास सुबह लगती है तो शाम को निजी स्कूल में पढ़ाते हैं। वहीं यदि शाम को सरकारी स्कूल में क्लास है तो सुबह निजी स्कूलों में सेवा देते हैं। इतने में भी उनका मन नहीं भरता तो वे शाम को ट्यूशन क्लासेस में भी समय देते हैं। जबकि यह सिस्टम पूरी तरह से गलत है। सरकार की मानें तो शिक्षाकर्मियों को केवल अपने ही स्कूल के बच्चों के शिक्षा का स्तर बढ़ाना है और वे निजी स्कूलों में सेवा किसी भी सूरत में नहीं दे सकते।

शिक्षाकर्मियों की आर्थिक दशा को सुदृढ़ करने सरकार ने उन्हें संविलियन की सौगात भले ही दे दी है, लेकिन शिक्षाकर्मियों की फितरत में सुधार नहीं हो रहा है। आज भी ५० फीसदी शिक्षाकर्मी बेमन काम कर रहे हैं या फिर पार्ट टाइम जॉब। यही वजह है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर नहीं बढ़ रहा है। सरकार जहां शिक्षा में सुधार की बात करती है, वहीं शासकीय पद पर पदस्थ होने के बावजूद शिक्षाकर्मी बच्चों को स्कूल में भगवान भरोसे छोड़ चंद रुपयों की लालच में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस प्रकार देखा गया है कि शहर के दर्जनों प्राइवेट स्कूलों में शिक्षाकर्मी अध्यापन कार्य करा रहे हैं। इसके अलावा वे ट्यूशन भी दे रहे हैं। अपने पदस्थ स्थान में न जाकर वे दोहरा लाभ ले रहे हैं। दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल के संचालक शिक्षाकर्मियों के बदौलत स्कूल संचालित कर रहे हैं।

कोर्स पूरा करने का चल रहा ठेका
निजी स्कूल संचालक हाई एवं हायर सेकंडरी के विषयों का कोर्स पूरा करने के लिए शिक्षाकर्मियों को एकमुस्त ठेका दे रहे हैं। शिक्षाकर्मियों को इस काम के एवज में तीन से चार हजार रुपए दिया जा रहा है। शिक्षक कोर्स चार महीने में पूरा कराये या छह महीने में। कोर्स पूरा करने तक उनको स्कूल में नियुक्त किया जाता है। अधिकांश शिक्षाकर्मी दो से तीन घंटे के भीतर कई स्कूलों में घूम-घूमकर अपने विषय की पढ़ाई कराते हंै। इसके बाद वह अपने मूल शाला की ओर रुख करता है। इस तरह के कारोबार में बीईओ व डीईओ बेखबर हैं।

निजी स्कूल संचालक इसलिए लेते हैं ठेके पर
निजी स्कूल संचालक कम रुपए में शिक्षक खोजते हैं। एक पोस्ट ग्रेजुएट निजी शिक्षक कम से कम १० हजार रुपए की मांग करता है। जबकि इसी दस हजार रुपए में उसे तीन ठेके के शिक्षक मिल जाते हैं। इसके चलते उनके स्कूलों का कोर्स भी पूरा हो जाता है। यही वजह है कि निजी स्कूलों के लिए शिक्षक नहीं मिल पाते। रही बात छात्रों की तो वे ट्यूशन कर अपना कोर्स जैसे-तैसे पूरा कर लेते हैं। वहीं दोनों पाटों में अभिभावकों की जेब ढीली होती है। उसे निजी स्कूलों की मोटी फीस जमा करनी होती है। उपर से छात्र के ट्यूशन के पीछे हर माह पांच सौ से एक हजार रुपए जमा करना पड़ता है।

-इस तरह की सूचना हमें अभी तक नहीं मिली है। अगर इस प्रकार का मामला आता है तो इनकी मौके पर जाकर प्रमाणित दस्तावेज की जांच की जाएगी और सही पाए जाने पर कार्रवाई करेगें। नियम के मुताबिक शिक्षाकर्मी प्राइवेट स्कूलों के अलावा ट्यूशन क्लास नहीं चला सकते- जीपी भास्कर, जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर

बड़ी खबरें

View All

जांजगीर चंपा

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग