
जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय में बिजली व पानी की समस्या ने लोगों को अच्छा खासा परेशान कर रख दिया है। एक ओर मेंटेनेंस के नाम पर दिन में हर घंटे बिजली गुल की जा रही है,
तो वहीं पानी का जल स्तर पूरी तरह डाउन होने से लोगों को पीने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। लोगों को उम्मीद थी कि नहर से राहत की धार खुलेगी, लेकिन पांच दिन बाद भी राहत की धार में बढ़ोतरी नहीं होने से बोर का जलस्तर नहीं बढ़ पा रहा है। लोगों को इस भीषण गर्मी में चौतरफा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला मुख्यालय जांजगीर भले ही पिछले दो दशकों से जिला मुख्यालय का दर्जा प्राप्त कर लिया है, लेकिन अभी भी यहां की बिजली पानी की व्यवस्था गांव से भी बदतर है। हर दो चार घंटे में बिजली गुल हो रही। पीने के लिए घरों में पानी नहीं है। लोग चौतरफा परेशानियों से घिरे हुए हैं।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां पानी की समस्या से निपटने नगरपालिका के फंड में करोड़ो रुपए जाम है, लेकिन शहर की 50 फीसदी आबादी गर्मी के दिनों में टैंकरों के सामने लाइन लगते देखे जा सकते हैं। शहर के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को शहर के लोगों की समस्या से कोई सरोकार नहीं है। चुनाव आने पर उन्हें केवल वोट की चिंता रहती है। वहीं जिला मुख्यालय के अधिकारियों को भी शहर की समस्या से कोई सरोकार नहीं रहा। उन्हें तो केवल बिलासपुर से अपडाउन कर नौकरी करना है।
हर रोज चल रहा मेंटेनेंस का दौर
जिला मुख्यालय में मेंटेनेंस के नाम पर हर रोज बिजली कटौती की जा रही है। एक ट्रांसफार्मर का पॉवर बढ़ाने के नाम पर बिजली गुल की जा रही है तो वहीं गर्मी में मेंटेनेंस के लिए दिन भर बिजली का लुकाछिपी का खेल बदस्तूर जारी है। भीषण गर्मी में उन घरों में अधिक परेशानी हो रही है जिनके घरों में छोटे बच्चे हैं।
बच्चे गर्मी के कारण झुलस रहे हैं। जिनके घर इनवर्टर लगा है उन्हें तो दिक्कतें नहीं हो रही है। जिनके घरों में केवल बिजली पर निर्भर है उन्हें बिजली नहीं होने से झुलसना पड़ रहा है। गौरतलब है कि इन दिनों विद्युत वितरण कंपनी शहर के भीतर हाईपावर ट्रांसफार्मर लगा रही है ताकि वोल्टेज बढऩे की स्थिति में कहीं फाल्ट न आए। क्योंकि घरों में अब एसी का चलन बढ़ रहा है।
जिसके चलते लोड बढ़ रहा और आए दिन फाल्ट आ रहा है। समस्या से निपटने विद्युत वितरण कंपनी लोगों को राहत जरूर दे रही है वहीं ऐसे दौर में विद्युत विच्छेदन कर कटौती करना लोगों को परेशान करने के अलावा कुछ भी नहीं है। बड़ी दिक्कत तब होती है जब रात को भी बिजली गुल कर दी जाती है।
नहर की नहीं बढ़ रही धार
गर्मी के सीजन में हर साल नहर से पानी छोड़ा जाता है। ताकि लोगों को राहत मिले। निस्तारी के लिए लोगों को पानी मिले। इतना ही नहीं नहर के पानी से शहर का जल स्तर बढ़े, लेकिन इस वर्ष नहर में जितना पानी छोड़ा गया है वह पर्याप्त नहीं है। नहर में केवल चार इंच का पानी चल रहा है।
जिससे लोगों को निस्तरी के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। बोर के हलक सूखने के कारण लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। जहां एक -एक बोर है, वहां अब लोग बोर खुदवाने के लिए एसडीएम कार्यालय में आवेदन जमा कर रहे हैं। लेकिन उन्हें बोर खुदवाने की अनुमति नहीं मिल पा रही है।
नगरपालिका में भी पर्याप्त टैंकर की व्यवस्था नहीं है। नगरपालिका में मात्र छह टैंकरों से शहर के 25 वार्डों में पानी की सप्लाई की जा रही है। जो शहर के 45 हजार उपभोक्ताओं के लिए कम साबित हो रहा है। सुबह से लेकर शाम तक लोग बर्तनों को लेकर टेंकर आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं, लेकिन उन्हें टैंकरों से भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
Published on:
20 Apr 2018 01:50 pm
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