
टॉपिक ऑफ द डे
जांजगीर-चांपा. पत्रिका डॉट काम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में टीसीएम कॉलेज के अतिथि प्राध्यापक आनंद अग्रवाल शामिल हुए। उनका मानना है कि लोग अपनी जाति की बजाए नाम व कर्म से पहचाने जाएं, जिससे जातिगत व्यवस्था में बदलाव को सहयोग मिलेगा और समाज में सामंजस्य व एकरूपता आएगी।
पेशे से शिक्षक आनंद अग्रवाल ने जातिगत व्यवस्था में बदलाव के लिए वकालत करते हुए कहा कि इससे केवल लोगों के बीच वैमनस्यता फैल रही है। इसका लाभ किसी को नहीं मिल रहा है। जिन्हें मिल भी रहा है, वे भी कमोबेश इस व्यवस्था से छुटकारा चाहते हैं। अग्रवाल का कहना रहा कि लोगों को आज संबोधन भी जाति आधारित है।
किसी कार्यालय व संस्थान में जाने पर पूछना पड़ता है कि तिवारी जी कहां हैं, वर्मा जी क्या कर रहे हैं। इसके बजाए लोग अपने नाम को ही प्राथमिकता दें, जिससे लोगों की जुबान में केवल व्यक्ति का नाम रहे। उन्होंने आमजन को सलाह देते हुए कहा कि वे अपने नाम के साथ जातिसूचक सरनेम लगाने की बजाए अपने माता-पिता का नाम लगा सकते हैं। इससे समाज में सभी के बीच एकरूपता आएगी। उन्होंने शासन-प्रशासन के साथ प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से भी इस संबंध में बदलाव करने का आग्रह किया।
उनका कहना रहा कि संविधान में कुछ ऐसे संसोधन किए जाएं, जिससे जातिगत व्यवस्था सार्वजनिक तौर पर अस्वीकार्य हो और लोग भी इसमें सहभागिता निभाते हुए केवल अपने नाम के साथ कर्म के लिए जाने जाएं।
उनका कहना रहा कि लोग आज जातिगत व्यवस्था के तहत तो समाज में रह नहीं रहे हैंए सभी अपनी काबिलियत के आधार पर कार्य कर रहे हैं और समाज के साथ देश के विकास में योगदान दे रहे हैंए फिर इसमें किसी वर्ग विशेष की योगदान को अलग से दर्शाने की जरुरत ही नहीं रहेगी। उन्होंने सोशल मीडिया में भी इस तरह के प्रचार-प्रसार को गलत बताते हुए मानव हित की बातों पर चर्चा का आग्रह किया। उनका मानना है कि जातिगत व्यवस्था में इस तरह के बदलाव से लोगों को स्कूलए कॉलेजों में फार्म भरने के साथ अन्य क्षेत्र में भी सहुलियत मिलेगा।
Published on:
15 Apr 2018 02:23 pm
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