
गृह निर्माण मंडल द्वारा बनाए गए अटल आवास में अमीरों का कब्जा होते जा रहा है। अटल आवास के रिकार्ड में बीपीएल कार्डधारियों का नाम जरूर रहता है
जांजगीर-चांपा. गृह निर्माण मंडल द्वारा बनाए गए अटल आवास में अमीरों का कब्जा होते जा रहा है। अटल आवास के रिकार्ड में बीपीएल कार्डधारियों का नाम जरूर रहता है
लेकिन उक्त मकान में अमीर वर्ग के लोग निवास कर रहे हैं। वहीं गरीब वर्ग के हितग्राही योजना से वंचित रहते हैं। हालांकि कई गरीब ऐसे हैं जो अपना कार्ड व मकान अमीरों को लाखों रुपए में बिक्री कर चुके हैं, ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान नहीं होने से इस तरह का बरोबार फल फूल रहा है।
जिला मुख्यालय में शासन के दो तरह के मकान बने हैं। वर्ष 2006-7 में शंाति नगर में तकरीबन 100 अटल आवास बने थे। इसके बाद हसदेव विहार कालोनी में अटल आवास के 100 मकान 3 साल पहले बहने बने हैं। यह मकान रिकार्ड में गरीबों के नाम से दर्ज है,
लेकिन अमीरों का वास हो रहा है। गरीब वर्ग के हितग्राहियों को न मिलकर अमीर वर्ग के लोग कब्जा किए हुए हैं। कुछ ऐसे ही परेशानियों से तंग आकर दर -दर भटकते प्रौढ़ दंपती ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अटल आवास योजना के मकान दिलाने का आग्रह किया है। केरा रोड मुर्रा भ_ा के पास रहने वाला रामू सोनी व उसकी पत्नी पीतर बाई आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
इनके पास आवास की सुविधा नहीं होने से वे दूसरों के मकान के बरामदे व सार्वजनिक भवनों में रहकर दिन बिताते हैं।
70 सावन देख चुके दंपती जिस समय 2006 में शांति नगर में नगरपालिका द्वारा बनाए जा रहे अटल आवास के लिए नगरपालिका से आवेदन देकर एक मकान की मांग की थी, लेकिन 9 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अटल आवास में मकान नहीं मिला। साल भर पहले नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद रामू सोनी ने सीधे प्रधान मंत्री को पत्र लिखकर अटल आवास दिलाने की मांग की है।
रामू सोनी का कहना है कि शांति नगर स्थित अलट आवास दिलाने नगरपालिका के पांव घिस गए, लेकिन पालिका के अधिकारियों ने आज तक उनकी आवेदन को गौर नहीं किया। अलबत्ता उसे मजबूरन नरेंद्र मोदी को पत्र लिखना पड़ा। हालांकि पत्र का जवाब तब तक नहीं आया है। इससे उसे अभी भी अपनी पत्नी के साथ जैसे तैसे बिना घर के दिन काटना पड़ रहा है।
कई मकान खंडहर में तब्दील- शंाति नगर में अटल आवास के 100 मकान बने हैं। जिसमें 75 फीसदी मकान हितग्राहियों को अलाट हुआ है, लेकिन वे किसी दूसरे के पास बिक्री कर चुके हैं। वहीं 25 फीसदी मकान में लोगों का रहना हो रहा। जिस मकान में लोग रह रहे हैं वह मकान भी उनका अपना नहीं है। किराए लेकर गरीब तबके के लोग निवास कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि एक ओर गरीब वर्ग के लोगों का योजना का लाभ लेने पांव घिस जा रहा है। वहीं शासन व आम लोग ऐसी योजना का बंदरबाट करने तुले हुए हैं।
मकान में काला कारोबार- गृह निर्माण मंडल के मकान शहर के आउटर में बने हैं। 75 फीसदी मकान खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इन मकानों में रात को काला कारोबार होता है। इस बात का प्रमाण पुलिस रिकार्ड बयां कर रहा है। आए दिन ऐसे मकानों में संदिग्ध स्थिति में जोड़े पकड़े जाते हैं। पुलिस इन्हें अपने कब्जे में लेकर कार्रवाई जरूर करती है। पीटा एक्ट लागू नहीं होने से ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं होती। अलबत्ता ऐसे मकान प्रेमी जोंड़ों के लिए वरदान बना हुआ है।
जानकारी ली जाएगी- अटल आवास में इस तरह का कारोबार हो रहा इसकी जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। शांति नगर में बने मकान में हमारा नियंत्रण नहीं है, हसदेव विहार की जानकारी ली जा सकती है।
-डीएन खलखो, एसडीओ, छग गृह निर्माण मंडल
Published on:
11 Oct 2017 07:21 pm
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