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गौरतलब है कि, जिले में तकरीबन सौ से अधिक छात्रावास संचालित है। जिसमें ५० फीसदी कन्या छात्रावास है। इन छात्रावासों में अब सीसी कैमरे लगाए जाएंगे। ताकि बेटियों की सुरक्षा व्यवस्था में कोई कसर न रहे। अधिकतर छात्रावास खंडहर हो चुके हैं तो वहीं कई छात्रावासों की बिल्डिंग बनकर तैयार हो चुका है वहां अन्य मूलभूत सुविधाएं बढ़ाई जा रही है। सबसे खास बात यह है कि इन छात्रावासों में सीसी कैमरे की सुविधा दी जा रही है। ताकि बेटियों की सुरक्षा में कोई कसर न रहे। जिले में ऐसे कई पोस्टमैट्रिक कन्या छात्रावास है जहां सीसी कैमरा नहीं लगा है। जिससे वहां की सुरक्षा व्यवस्था ताक पर रहती है। ऐसे पोस्टमैट्रिक कन्या छात्रावास में चोरिया, पंतोरा, तनौद, भुईगांव, पामगढ़, ससहा सहित एक दर्जन छात्रावास शामिल है। जहां बेटियों की सुरक्षा के लिए सीसी कैमरे की व्यवस्था की जा रही है। ताकि सुरक्षा व्यवस्था के बीच छात्रावासों में बेटियां रह सकें।
जर्जर छात्रावासों की कराई जा रही मरम्मत
जिले में दर्जन भर से अधिक ऐसे छात्रावास हैं जो बेहद जर्जर स्थिति में है। इन छात्रावासों में रंग रोगन कर सुविधाएं बढ़ाई जा रही है। छह माह पहले इसके लिए तकरीबन एक करोड़ रुपए का टेंडर हुआ था। जिसका काम अंतिम दौर में है। छात्रावासों में और भी सुविधाएं बढ़ाने के लिए आदिम विकास विभाग द्वारा जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
अब भी कई छात्रावास किराए के भवन में
जिले के अधिकतर छात्रावास किराए के भवन में संचालित हो रहा है। जिसकी भरपाई राज्य सरकार कर रही है। यदि खुद का भवन होता तो सरकार को आर्थिक नुकसान का सामना करना नहीं पड़ता। हालांकि सरकार ने बजट में जहां जहां स्वीकृति मिल रही है वहां वहां भवन निर्माण की अनुमति दे रही है। लेकिन अब भी ऐसे कई दर्जनों छात्रावास है जो किराए के भवन में संचालित है।
जर्जर भवन को करेंगे डिस्मेंटल
जिले में अभी कई ऐसे छात्रावास भवन है तो बेहद जर्जर हो चुका है। इसे डिस्मेंटल करने की जरूरत है, लेकिन बजट की स्वीकृति नहीं मिलने से छात्रावास में अध्ययनरत छात्रों को दिक्कतों का सामना करते हुए रहना पड़ रहा है। अब ऐसे छात्रावास भवनों को डिस्मेंटल कर नए सिरे से बनाया जाएगा। लेकिन बजट की डिमांड की गई है लेकिन स्वीकृति नहीं मिली है।
वर्जन
छात्रावासों में सुविधाएं बढ़ाने के लिए अब सीसी टीवी कैमरे लगाए जाएंगे। खासकर पोस्टमैट्रिक कन्या छात्रावास में यह सुविधा प्रमुखता से दी जा रही है। जर्जर छात्रावासों को भी डिस्मेंटल कर नए भवन में शिफ्ट किया जा रहा है।
- सीएचके सिंह उईके, सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग
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Published on:
30 Oct 2023 10:28 pm
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