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सालभर में ही शहर के दोनों प्री- पेड बूथों में लटक गया ताला

तामझाम के साथ पिछले साल ८ मार्च को हुई थी शुरूआत, यात्री फिर अधिक कराया देने मजबूर

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तामझाम के साथ पिछले साल ८ मार्च को हुई थी शुरूआत, यात्री फिर अधिक कराया देने मजबूर

तामझाम के साथ पिछले साल ८ मार्च को हुई थी शुरूआत, यात्री फिर अधिक कराया देने मजबूर

जांजगीर-चांपा. प्री पेड बूथ सालभर में ही लचर व्यवस्था की भेंट चढ़ गई। बड़े शहरों की तर्ज पर और आटो चालकों की मनमानी पर रोक लगाने पिछले साल 8 मार्च को कचहरी चौक और जांजगीर-नैला रेलवे स्टेशन के सामने प्री पेड बूथ बनाया था। तामझाम के साथ अधिकारियों ने इसका शुभारंभ किया था।


पहले सवारियों को प्री पेड बूथ से टिकट लेना है। इसके बाद आटो में बिठाना था। प्री पेड बूथ पर टिकट के साथ ही संबंधित ऑटो का नंबर दिया जाना चाहिए, मगर रेलवे स्टेशन में जैसे ही कोई ट्रेन आती है तो आटो चालक सवारियों को सीढ़ी के पास से ही सीधे आटो में लेकर बिठा रहे हैं। यही स्थिति कचहरी चौक पर ही है। यहां से भी सीधे आटो चालक सवारी बिठा रहे हैं।

इससे मनमाना किराए पर रोक लगाने की योजना फ्लाप हो गई। शिवरीनारायण मेले में जवानों की ड्यूटी लगाने अधिकारियों ने प्री पेड बूथों से जवानों को हटा दिया। इसके बाद से अब तक इन बूथों का ताला ही नहीं खुल रहा है। रेलवे स्टेशन से कलेक्टोरेट, जिला पंचायत, जिला अस्पताल, जिला एवं सत्र न्यायालय, एसपी कायालर्य सहित अन्य दफ्तर करीब पांच किलोमीटर दूर में हैं। इन स्थानों में जाने के लिए समय पर सिटी बस नहीं मिलने पर लोगों को ५०से 100 रुपए तक ले लिया जाता है।


ट्रेन रुकने पर बूथ तक जाने ही नहीं देते यात्रियों को
पत्रिका की टीम ने प्री पेड बूथ की हकीकत जानी। प्लेटफार्म में जैसे ही कोई सवारी रूकती थी और यात्रियों प्लेटफार्म से बाहर निकलते हैं, वैसे ही आटो चालक सीढ़ी तक पहुंच जाते थे और गंतव्य स्थान का पता पूछने और रेट तय कर सीधे वाहन में बिठा लेते थे। प्री पेड बूथ तक कोई भी यात्री पहुंच नहीं पाता था। अगर कोई यात्री भूले-भटके बूथ तक पहुंच जाता था तो उसे ताला लटक मिल रहा था।


नहीं जानते क्या है प्री पेड बूथ
विडंबना यह है कि ट्रेन, बसों में सफर करने वाले अधिकतर यात्रियों को यह पता भी नहीं है कि प्री पेड बूथ भी बना है। कोरबा से आए नरेंद्र कुमार ने बताया कि जांजगीर के एक कॉलेज में स्टूडेंट है और ट्रेन से ही ज्यादातर आना जाना करते हैं। लेकिन प्री पेड बूथ होने की जानकारी उन्हें नहीं थी। जिले के सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक ने बताया कि वह प्रतिदिन ट्रेन से आना-जाना करते हैं। यहां प्री पेड में पहले टिकट लेना पड़ता है इसकी जानकारी किसी ने नहीं दी।


क्या है प्री पेड बूथ, कैसे मिलती है सुविधा
यात्रियों को प्री पेड बूथ में अपने जाने का स्थान बताना होता है। बूथ में पैसा जमा करने के बाद यात्री को एक टोकन दिया जाता है जिसमें ऑटो का नंबर, चालक का नाम रहता है। उस ऑटो में बैठकर जाना होता है। ऑटो चालक संबंधित जगह पर यात्री को छोड़ देगा। इसमें रुकते चालक अपने हिसाब से किराया नहीं ले सकता।


छुट्टी पर गए तो व्यवस्था बने या बिगड़े, कोई मतलब नहीं
विडंबना है कि जिन अफसरों को व्यवस्था संचालन की जिम्मेदारी दी जाती है वे अगर छुट्टी पर है तो वे व्यवस्था बने या बिगड़े, इसकी परवाह नहीं होती। प्री पेड बूथों के बंद होने के संबंध में जब ट्रैफिक डीएसपी शिवचरण परिहार से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने अभी मैं छुट्टी में हूं, जो भी है आकर बात करेंगे कहकर बात कर पाने से मना कर दिया।