
जिले में 8 सरकारी नर्सरी में आम का बंफर उत्पादन, 12 लाख 29 हजार रुपए में बिके
जांजगीर-चांपा. सरकारी नर्सरी में इस बार आम के पेड़ फलों से लदे हुए हैं। जिले के आठ सरकारी नर्सरी में आम की बंफर पैदावार हुई है। जिसके कारण नीलामी में अब तक का रिकार्ड टूट गया है। इस साल आठ नर्सरी में फले आम की १२ लाख २९ हजार ७६२ रुपए में बोली लगी है। अब तक किसी भी साल आम की नीलामी इतनी राशि में नहीं हुई है। इस साल सबसे ज्यादा पैदावार बम्हनीडीह ब्लॉक के करनौद नर्सरी में हुई है। अकेले यहां फले आमों की ही बोलीे ६ लाख ५१ हजार रुपए में है।
उल्लेखनीय है कि जिले में उद्यानिकी विभाग की नौ सरकारी है। जिसमें आम का उत्पादन हुआ है। पिछले दिनों ही उद्यानिकी विभाग द्वारा सभी सरकारी नर्सरी में फले आमों की बिक्री के लिए बोली लगाई गई। जिसमें ८ नर्सरी में पैदावार हुए आम की नीलामी १२ लाख २९ हजार ७२६ रुपए में हुई। वहीं बलौदा ब्लॉक के चारपारा नर्सरी में आम का उत्पादन नहीं होने से यहां नीलामी नहीं हुई। अफसरों ने बताया कि इस साल मौसम ने अच्छा साथ दिया। हवा, तूफान ज्यादा नहीं आने से फलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। जिसके कारण आम की पैदावार ज्यादा हुई। बता दें, पिछले साल सरकारी नर्सरी में आम का अकाल पड़ा हुआ था। ले-देकर करनौद नर्सरी में ही आम का पैदावार हुआ था और १ लाख १० हजार रुपए की बोली लगी थी। बाकी ८ नर्सरी में आम का अकाल पड़ गया था और कहीं भी नीलामी नहीं हो पाई थी।
जिले में करनौद नर्सरी आम का बेताज बादशाह
बम्हनीडीह ब्लॉक में स्थित करनौद नर्सरी में ही आम का सबसे ज्यादा उत्पादन हो रहा है। पिछले साल जब सभी सरकारी नर्सरी में आम का अकाल था तब भी यहां आम फले थे। हालांकि पैदावार कम हुई थी। जबकि इसके पूर्व भी जब सभी सरकारी नर्सरियों में आम की पैदावार हुई थी तब भी करनौद नर्सरी सबसे आगे थी। तब ३ लाख ८१ हजार रुपए नीलामी से मिले थे। अफसरों का कहना है कि बम्हनीडीह ब्लॉक की मिट्टी मटासी टाइप की है जिसके कारण आम ही नहीं बल्कि अन्य फसलों की पैदावार भी सबसे ज्यादा होती है।
पेड़ों पर लगे फलों की ही लग जाती है बोली
बता दें, आम की नीलामी में पेड़ों पर लगे फलों को देखकर अनुमाति पैदावार के हिसाब से होती है। बोलीकर्ता अनुमाति उत्पादन के हिसाब से बोली की शुरूआत करते हैं। सबसे ज्यादा बोली लगाने वालों को नीलामी मिलती है। कुल राशि का ५० प्रतिशत बोलीकर्ता द्वारा तत्काल जमा किया जाता है और ५० प्रतिशत राशि आधे फल तोडऩे के बाद जमा करना होता है। बोलीकर्ता फलों को मजदूरों से तुड़वाकर मार्केट में बेचता है। अगर अनुमानित पैदावार से कम फल मिलते हैं तो नुकसान उठाना पड़ता है। इस साल आम का पैदावार अधिक होने से बाजार में भाव में कम होने की उम्मीद है।
ये आम लगे हैं इस साल नर्सरियों में
जिले के सभी सरकारी नर्सरी में आम की दर्जनभर वैरायटी की पैदावार हुई है। इसमें सभी उच्च वैरायटी है जैसे दशहरी, चौसा, लगड़ा, बाम्बे ग्रीन, सिंदूरी। इन आमों की मांग ही सबसे ज्यादा होती है।
2017 में 10 लाख 72 हजार की लगी थी बोली
वर्ष २०१६-१७ में भी आम का अच्छा उत्पादन सरकारी नर्सरी में हुआ था और १० लाख ७२ हजार १०० रुपए में नीलामी हुई थी। इस साल यह दो लाख रुपए बढ़कर १२ लाख रुपए जा पहुंचा है। करनौद के बाद मुड़पार और भूतहा में ही अच्छी पैदावार हुई थी।
जानिए, किस नर्सरी के आम की कितनी लगी बोली
चुरतेली ७१ हजार रुपए
एसएन पटेल सहायक संचालक उद्यानिकी जांजगीर-चांपा
Published on:
21 May 2019 05:40 pm
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