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एक माह में केवल 200 सीट ही बढ़ा पाए 49 नोडल अफसर, आरटीई से गरीब बच्चों को नहीं मिल रहा अधिकार

अब तक 2330 छात्रों की ही हो पाई भर्ती

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अब तक 2330 छात्रों की ही हो पाई भर्ती

अब तक 2330 छात्रों की ही हो पाई भर्ती

जांजगीर-चांपा. शिक्षा के अधिकार के तहत जिले के नोडल अफसर गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई दे रहे हैं। शिक्षा सत्र को डेढ़ माह बीत गए लेकिन अब तक फार्म की स्कू्रटनी नहीं हो पाने के कारण छात्रों की भर्ती नहीं हो पा रही है।

काम के दबाव कहें या कुछ और अब तक केवल 2330 बच्चों की भर्ती हो पाई है। जबकि एक माह पहले 2130 बच्चों की भर्ती पहले हो चुकी थी। यानी एक माह के भीतर 3160 आवेदनों में केवल 200 बच्चों की नई भर्ती कर पाए।


शिक्षा के अधिकार के तहत गरीब बच्चों के ऑनलाइन भर्ती में पांच हजार 290 आवेदन जमा हुए थेए जिसमें 2130 गरीब बच्चों का ही आवेदन सही पाया गया और उन्हें निजी स्कूलों में भर्ती किया गया। इसके बाद टारगेट पूरा नहीं होने की स्थिति में पुराने आवेदनों की फिर से स्क्रूटनी कर नए सिरे से भर्ती के लिए 49 नोडल अफसरों को लगाया गया था। इतने नोडल अफसरों ने एक माह के भीतर केवल 200 नए बच्चों की ही भर्ती कर पाए।

जबकि शासन को 4200 बच्चों के प्रवेश दिलाने के लिए टारगेट दिया गया है। एक ओर सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत हर हाल में गरीबों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए भरपूर कोशिश कर रही है।

ताकि अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़ेए लेकिन शिक्षा विभाग के अफसर इस योजना का पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इस साल शासन ने ऑनलाइन आवेदन जमा करने की प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन आवेदन में ढेरों खामियां नजर आई थीए क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने बच्चों को आवेदन जमा करने में मापदंडों का पालन नहीं किया था। सबसे अधिक गरीबी रेखा के सर्वे सूची में नाम की खामियां सामने आई थी।

जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्रए सर्वे सूची में नामए स्कूल की दूरियों में नजर आई थी। अधिकतर लोग मानक के अनुरूप गरीबी रेखा के कार्ड उपलब्ध नहीं कराए थे। जिसके चलते बड़ी तादात में आवेदन निरस्त हो गए। थोड़ा बहुत कसर रहा था जिसे नोडल अफसरों ने गल्ती कर फार्म रिजेक्ट कर दिया था।

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2960 आवेदन अभी भी अधर में
आरटीई के तहत 30 मई तक 5 हजार 290 आवेदन जमा हुआ था। जिसकी स्क्रूटनी मध्य जून में हुई। जिसमें 2130 छात्रों को ही प्रवेश मिल पाया। शेष 3160 आवेदन रिजेक्ट हो चुके थे। जिले के 49 नोडल अधिकारियों द्वारा फार्म की चेकिंग की गई थी। जिसमें एक माह के भीतर केवल 200 सीटें ही बढ़ी और अब 2960 आवेदन डीईओ आफिस में धूल खाते पड़ी है।


शिक्षा सत्र को डेढ़ माह खत्म
जिले में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। मौजूदा शिक्षा सत्र को डेढ़ माह बीत गएए लेकिन नोडल अफसर की कार्यप्रणाली के चलते गरीब बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। हजारों फार्म डीईओ आफिस में धूल फांक रही है। लेकिन नोडल अफसर इस फार्म में नजरें इनायत नहीं कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें फुर्सत नहीं है। नोडल अफसर इन दिनों स्कूलों की मान्यता दिलाने सहित अन्य कार्यों में मस्त हैं।


-शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में भर्ती के लिए तिथि बढ़ाई गई थी। नोडल अफसर फार्मों की स्क्रूटनी कर रहे हैं। भर्ती अभी जारी है।
-जीपी भास्कर, डीईओ

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