
जांजगीर-चांपा. आरटीई यानी शिक्षा के अधिकार अधिनियम के नियम एवं शर्तों को पूरा नहीं करने वाले जिले के ३५ स्कूलों की मान्यता डीईओ ने समाप्त कर दी है। अब ये स्कूल आरटीई के तहत गरीब बच्चों का दाखिला अपने स्कूलों में नहीं कर पाएंगे। वहीं योजना का लाभ लेने वंचित हो जाएंगे। इतना ही नहीं अब इन्हें स्कूल चलाने के लिए भी रायपुर से अनुमति लेनी पड़ेगी। डीईओ अब ऐसे स्कूलों के संचालन के लिए अनुमति देने पर विचार करेगी। आखिरकार तय समय तक मान्यता नहीं लेने वाले ३५ स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी है। जिन स्कूलों की मान्यता समाप्त की गई है उसमें जिले का सबसे बड़ा स्कूल डीपीएस स्कूल घुठिया चांपा का भी नाम शामिल है।
जिले के ३५ निजी स्कूल संचालकों को शिक्षा के अधिकार के तहत नियमों का पालन करना बड़ा महंगा पड़ गया। दरअसल स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षा के अधिकार के तहत मान्यता की शर्तों का पालन कराने के लिए कड़े नियम बनाए हैं। खास तौर पर आईटीई के तहत गरीब छात्रों की निजी स्कूलों में भर्ती के लिए विभाग पारदर्शिता बनाने जा रही है। ताकि कोई भी निजी स्कूल संचालक इस अधिनियम का माखौल न उड़ाए। इसके बाद भी निजी स्कूल संचालक मनमानी को तुले थे।
हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग निजी स्कूल संचालकों से साफ कहा था कि आरटीई के तहत भर्ती के लिए वे अपने स्कूलों के रिक्त सीटों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पूरी रिपोर्ट नेट में अपलोड कराएं। इसके लिए उन्हें ३ मई तक का समय दिया गया था। जिले के ४१४ निजी स्कूलों में ३७९ स्कूल संचालकों ने अपरी पूरी जानकारी नेट में उपलब्ध करा दी, लेकिन ३५ स्कूलों ने यह जानकारी पांच मई तक नहीं दी। जिसके चलते शिक्षा विभाग ने सात मई को ३५ निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी है। शासन की इस आदेश से स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
अब लगाएंगे राजधानी का चक्कर
जिन निजी स्कूल संचालकों ने मान्यता संबंधित शर्तों का अब तक पालन नहीं किया है ऐसे स्कूल संचालक अब डीईओ आफिस के चक्कर काटते फिर रहे हैं। सोमवार को दफ्तर में भीड़ लगी रही। अब इन्हें राजधानी का चक्कर काटना होगा। क्योंकि डीइओ स्तर पर कार्रवाई कर पूरी रिपोर्ट राजधानी भेज दी गई है। अब इन स्कूलों की सुनवाई जिला स्तर पर नहीं बल्कि राजधानी स्तर पर होगी। वहीं डीईओ भी ऐसे स्कूलों के बारे में राजधानी से राय मांग रहे हैं।
डीपीएस ने भी नहीं ली मान्यता
जिले में दिल्ली पब्लिक स्कूल का बड़ा नाम है। आरटीई के तहत इतने बड़े स्कूल ने भी मान्यता नहीं ली है। यानी साफ तौर पर कहा जा सकता है कि ऐसे बड़े स्कूल संचालक केवल मोटी फीस के बदौलत अपनी जेब भरने के लिए तुले हुए हैं। वहीं गरीब बच्चों को अपने स्कूल में दाखिला लेने के लिए कोताही बरत रहे हैं। डीईओ ने आरटीई के तहत जिन स्कूलों का नाम सार्वजनिक किया है उसमें डीपीएस स्कूल का नाम भी
शामिल है।
इन स्कूलों की मान्यता समाप्त
अकलतरा- मानस हायर सेकंडरी स्कूल पकरिया, सशिम पोड़ीदल्हा, दिव्य हासे बाना,
बलौदा - बाल भारती रसौटा, सशिमं जर्वे, डीपीएस स्कूल घुठिया, सिमना हासे कंडरा, बीडीएम पिसौद, रासेयो स्कूल बसंतपुर, एसबीएस कुरदा
बम्हनीडीह- सशिमं सेमरिया, गुरुकुल सेमरिया, कात्रे नगर सोंठी, सशिमं कड़ारी
नवागढ़ - एकेडमिक जांजगीर, सशिमं भैसमुड़ी, आविनि बुड़ेना, एचईएम धुरकोट, प्रतिमा कुरदा, सशिमं गोधना, पंचवटी गोधना, शबरी शिवरीनारायण, आदर्श हासे किरित, देव संस्कृति नेगुरडीह, देवरिशी नेगुरडीह, मिनिमाता खैरताल, एसएसवी खोखरा,
पामगढ़ - मुचरु सिंह मुलमुला, सशिमं सेमरिया, वीपीएस तनौद, आरके रसौटा, प्रतिभा खरौद, आक्सफोर्ड खरौद, महामाया जेवरा, संत माता सेमरिया
Published on:
08 May 2018 12:59 pm
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