
बगैर नक्शा और छोटे भू-खंडों की रजिस्ट्री की छूट, फिर भी 27 करोड़ रुपए का हुआ नुकसान
जांजगीर-चांपा. कांग्रेस सरकार द्वारा पांच डिसमिल से कम रकबे की रजिस्ट्री पर लगी रोक हटाने और बगैर बंटाकन नक्शा भी रजिस्ट्री होने की मिली छूट भी इस साल प्रापर्टी बाजार को उबार नहीं पाई। स्थिति तो ऐसी है कि इन नियमोंं में अगर छूट नहीं होती तो शायद पिछले साल की तुलना में टारगेट के आधी भी रजिस्ट्री नहीं होती। इन नियमों के शिथिल होने में अंतिम दो महीनों में जरूर तेजी दिखी, लेकिन जमीन खरीदी-बिक्री की रजिस्ट्री के बदले मिलने वाले पंजीयन शुल्क में जिला वार्षिक लक्ष्य से २७ करोड़ रुपए पीछे रह गया।
वित्तीय वर्ष २०१८-१९ में जमीन रजिस्ट्री से जिला उप पंजीयक विभाग को ७८ करोड़ रुपए आय का लक्ष्य रखा गया था। इसके एवज में अप्रैल १८ से मार्च १९ तक ५० करोड़ ७६ लाख १४ हजार रुपए की आय हुई। यानी लक्ष्य का ६५.०८ प्रतिशत ही रजिस्ट्री हो गई। इस तरह २७ करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व नुकसान हो गया। जमीन खरीदी-बिक्री का यह आंकड़ा देखे तो जमीन रजिस्ट्री से विभाग को पिछले साल से भी कम आमदनी हुई। पिछले वित्तीय वर्ष जमीन खरीदी-बिक्री से ५१ करोड़ ३ लाख २१ हजार रुपए रुपए आय हुई थी। जो इस साल की तुलना में २७ लाख ७ हजार रुपए ज्यादा है। जबकि पिछले साल पांच डिसमिल से कम रकबे की रजिस्ट्री में जहां रोक लगी हुई थी तो बगैर बंटाकन नक्शा भी जमीन रजिस्ट्री नहीं हो रही थी। ऐसे में इन नियमों में छूट मिलने से इस साल यह आंकड़ा बढऩा था। क्योंकि जमीन के भाव आसमान पर होने से सवा पांच डिसमिल जमीन खरीदना आसान नहीं था।
इन कारणों से जमीन रजिस्ट्री का टागरेट अधूरा
नोटबंदी और जीएसटी का असर कम होने के दावे जरूर किए जा रहे हैं लेकिन जमीन और मकानों की खरीदी नहीं बढ़ी है। यही कारण है कि इस साल भी उम्मीद से आधी ही रजिस्ट्री हुई और राजस्व के रूप में केवल ५० करोड़ रुपए ही प्राप्त हुए। जबकि टारगेट ७८ करोड़ का था।
शहर में सरकारी रेट और बाजार मूल्य में अंतर
स्टांप विक्रेताओं के अनुसार शहरों के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां का बाजार मूल्य, सरकारी मूल्य से कम है। इस कारण से लोग रजिस्ट्री नहीं कराते जिसका असर लक्ष्य पर भी पड़ता है।
20 हजार से अधिक का भुगतान चेक से
कम रजिस्ट्री होने के पीछे आयकर कानून में हुए संशोधन समेत रजिस्ट्री शुल्क में दी जाने वाली छूट भी शामिल है। नए नियमों के तहत २० हजार या उससे अधिक भुगतान नकद में नहीं हो रहा है। ऐसा करने पर आयकर कानून की धारा २७१ (डी) के तहत प्राप्त राशि के बराबर पेनाल्टी भी लगाई जा रही है। सारे काम ऑनलाइन हो रहे हैं। ई-स्टापिंग का चलन है।
अंतिम महीने में ज्यादा हुई रजिस्ट्री
इस साल जमीन खरीदी-बिक्री के आंकड़ों को देखे तो वित्तीय वर्ष में मार्च महीने में ही ज्यादा रजिस्ट्री हुई। मार्च महीने में कुल २४३० रजिस्ट्री हुई जो पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। पिछले साल मार्च महीने में कुल २३६९ जमीन रजिस्ट्री हुई थी। छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री होने के कारण अंतिम दिनों में ज्यादा रजिस्ट्री हुई मगर यह छूट लोगों को वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में यानी दो महीने ही मिल पाई। कांग्रेस सरकार आने के बाद जनवरी से यह लागू हुआ।
आंकड़ों में समझे दो साल की जमीन रजिस्ट्री को
वर्ष लक्ष्य आपूर्ति
२०१७-१८, ७८०००००००, ५१०३२१२३८
२०१८-१८, ७८०००००००, ५०७६१४५७८
Published on:
05 Apr 2019 06:53 pm
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