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त्योहारी सीजन में अमानक स्तर की खाद्य सामग्री की होगी धड़ल्ले से बिक्री, प्रशासन के पास नहीं कोई तैयारी

- जिले में 10 हजार खाद्य पदार्थों के व्यवसायी, पंजीयन केवल तीन हजार का

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त्योहारी सीजन में अमानक स्तर की खाद्य सामग्री की होगी धड़ल्ले से बिक्री, प्रशासन के पास नहीं कोई तैयारी

त्योहारी सीजन में अमानक स्तर की खाद्य सामग्री की होगी धड़ल्ले से बिक्री, प्रशासन के पास नहीं कोई तैयारी

जांजगीर-चांपा. खाद्य पदार्थों से संबंधित प्रतिष्ठान चलाने वाले व्यवसायायी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से पंजीयन कराने रुचि नहीं ले रहे हैं। नतीजनत दुकानों में नकली व अमानक स्तर की खाद्य सामग्री बिक्री हो रही है। विभाग भी ऐसे लोगों पर केवल जांच की औपचारिकता निभा रही है। पकड़े जाने के बाद भी इन पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो रही है। बीते एक साल के भीतर विभाग ने लगभग 70 से अधिक सेंपल ले चुकी है। जिसमें अमानक सामान की बिक्री होना पाया गया है, लेकिन आज तक दोषियों के खिलाफ किसी तरह की बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। अब इस दिवाली में भी ऐसे अमानक सामान बिक्री होगी और विभाग केवल जांच की औपचारिकता निभाएगी।

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छत्तीसगढ़ खाद्य संरक्षा अधिनियम 2006 एवं अधिनियम 2011 के तहत ऐसे दुकानों का सालाना पंजीयन होना अनिवार्य है जो अपनी दुकानों में एक बिस्किट से लेकर मिठाई, मेगी या कोई भी खाद्य सामाग्री की बिक्री करता है। जिले में लगभग 10 हजार से अधिक दुकानें हैं, जो अपनी दुकानों में खाद्य पदार्थों की बिक्री करते हैं। विभागीय नियम के मुताबिक होटल ढाबे जैसे बड़े व्यवसायियों को लाइसेंस लेना पड़ता है। इनकी फीस 5 हजार रुपए निर्धारित है। वहीं छोटे व्यवसायियों को पंजीयन कराना पड़ता है। इनकी फीस के तौर पर 2 हजार रुपए जमा करना पड़ता है।

दिलचस्प बात यह है कि 10 हजार व्यवसायियों में केवल गिनती के व्यवसायियों ने लाइसेंस लिया है और केवल दो से ढाई हजार व्यवसायियों ने पंजीयन कराया है, वहीं जिले भर में 7 हजार 500 व्यवसायियों का कारोबार बिना पंजीयन व रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। इन पर विभाग मेहरबान है। इनमें से केवल चंद व्यवसायियों को नोटिस दिया गया है कि वे अपने दुकान का पंजीयन कराएं, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी। विभागीय नोटिस को भी व्यवसायी हल्के में ले रहे हैं।

दिवाली में खुलेआम बिकेगी अमानक मिठाइयां
दिवाली के त्योहार को अब केवल माह भर शेष है। शहर सहित ग्रामीण अंचलों में अमानक स्तर की मिठाइयां मिलने लगेगी। विभाग की नजर भी ऐसे व्यवसायियों पर इसलिए शिकंजा नहीं कस पाती क्यों कि विभाग में अमले की कमी है। इसके चलते खुलेआम अमानक स्तर की मिठाइयां बिक रही है। दिवाली, राखी जैसे बड़े पर्व में शहर के चप्पे-चप्पे में मिठाई की इतनी दुकानें खुल जाती है कि विभाग भी गिनती नहीं कर पाती। ऐसे दुकानों में नकली खोवे से बनी मिठाई बिकती है। जिन पर विभागीय अधिकारियों की नजर नहीं पड़ती। खासकर शहर की दुकानों में भी विभाग की टीम नहीं पहुंच पाती। शहर में ऐसे कई दर्जनों होटल व खाद्य पदार्थों की दुकानें हैं। जहां विभागीय टीम नहीं पहुंच पाती।

-दिवाली सीजन में नकली खोवे से बनी मिठाइयां बिकने की सूचना मिलते रहती है। ऐसे प्रतिष्ठानों में पैनी नजर रखी जाएगी। ऐसे दुकानों से सेंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा खाद्य पदार्थ वाले दुकानों में भी छापामार कार्रवाई की जाएगी। जिन्होंने पंजीयन नहीं कराया है उनकी दुकानों में छापेमारी की जाएगी- डीके देवांगन, एफएसओ

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