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12 हजार से अधिक मरीजों के लिए संजीवनी बनी 108 एक्सप्रेस

108 की सेवा अपने नाम के अनुरूप ही जिलेवासियों को निरंतर त्वरित आपाकालीन सेवा प्रदान कर अपने संजीवनी नाम को सार्थक कर रही है। बीते वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर के दौरान जांजगीर-चांपा में 12713 लाभार्थियों को 108 संजीवनी एक्सप्रेस की त्वरित आपातकालीन सेवा का लाभ मिला।

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12 हजार से अधिक मरीजों के लिए संजीवनी बनी 108 एक्सप्रेस

12 हजार से अधिक मरीजों के लिए संजीवनी बनी 108 एक्सप्रेस

जांजगीर-चांपा. इसमें कोरोना महामारी के 51, आरटीए केस 1716, प्रेग्नेंसी 841, सुसाइड अटेम्ट 76, कार्डियक 1, पाइजनिंग 622, एनिमल बाइट 311 एवं अन्य जिनमें बेहोशी, डिहाइड्रेशन, फ्रेक्चर बर्न असॉल्ट, बैक पेन, सिर दर्द सहित अन्य बीमारियों के 9095 केस शामिल हैं। संचालन करने वाली संस्था जेएईएस द्वारा बताया गया कि 15 एम्बुलेंस के माध्यम से जिलेवासियों को बेहतर आपात कालीन सेवा दी जा रही है। इसमें से 1 एम्बुलेंस एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाली है। यह बेहद खास एम्बुलेंस में मॉनिटर, डी फिब्रिलेटर, सिरिंज पम्प, लेरेन्जो स्कोप और वेंटिलेटर जैसे अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस है। किसी भी क्रिटिकल परिस्थिति में मरीज को हॉस्पिटल लाने के दौरान उनकी जान बचाने में यह एम्बुलेंस काफी मददगार साबित हो रही है।
हर मौसम में तत्पर रहती है 108 की टीम
108 की पहचान आपातकालीन सेवा प्रदान करने की दिशा में एक कर्तव्यनिष्ठ टीम की है। संजीवनी कर्मी ठंड, चिलचिलाती धूप और तेज बारिश के बीच बिना मौसम और परिस्थितियों की परवाह किए आमजन मानस को बेहतर और आपातकालीन सेवाएं प्रदान करती है। गोल्डन ऑवर में घायलों का इलाज करते हूए उनकी जान बचाने में 108 संजीवनी एक्सप्रेस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ऑपेरशन राहुल में थी सक्रिय भूमिका
जिले के पिहरीद गांव में बोरवेल में गिरकर फंसे 11 साल के राहुल साहू की जान बचाने और सकुशल हॉस्पिटल पहुंचाने में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना शासन-प्रशासन के साथ 108 की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 108 संजीवनी कर्मी 2 एम्बुलेंस के साथ लगातार 5 दिन तक घटना स्थल पर जुटी रही। जैसे ही बोरवेल से राहुल को बाहर निकाला गया। उन्हें 108 संजीवनी एक्सप्रेस के द्वारा ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से ऑक्सीजन सपोर्ट पर अपोलो हॉस्पिटल पहुंचाया गया। राहुल सुरक्षित हॉस्पिटल पहुंचाना 108 कर्मियों के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं थी। क्योंकि विगत 104 घण्टे से राहुल सुरंग में फंसा हुआ था। 108 की टीम ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन निष्ठा और सेवा भाव के साथ किया।