
jila asptal
सीजीएमएससी 25 लाख 60 हजार रुपए की लागत से १० बिस्तर का बर्न यूनिट बना रहा है। जिला अस्पताल के फस्र्ट फ्लोर में यह बर्न बनाया जाएगा। इसे बनाने का काम कल से शुरू हो जाएगा। दो माह बाद में इसका लाभ जिलेवासियों को मिलने लगेगा। बर्न यूनिट बनने से जिला अस्पताल में ही जले लोगों का इलाज होगा और उन्हें अलग से वार्ड में रखा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग व सीजीएमएससी विभाग का कहना है जुलाई के अंत तक बर्न यूनिट को पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके बाद में संचालन किया जाएगा। बर्न यूनिट जिला अस्पताल की दूसरी मंजिल की छत पर बनाया जा रहा है। अभी तक कम जले मरीज का इलाज जिला अस्पताल में करते हैं, लेकिन ज्यादा गंभीर मरीज आ गए तो तत्काल बिलासपुर व रायपुर रेफर कर दिया जाता है। अब इनका भी उपचार हो सकेगा। सिविल सर्जन ने कहा कि यह जांजगीर जिले के लिए बड़ी उपलब्धि हैं। इसकी अधिक जरूरत थी। जांजगीर-चांपा को जिले बने आज २४ साल से ज्यादा समय हो गया। इसके बाद भी आज तक बर्न यूनिट की सौगात नहीं मिल पाई थी। बर्न यूनिट की जरूरत जिले को बहुत अधिक थी, लेकिन जिले के जनप्रतिनिधियों को इससे कोई मतलब नहीं है। आखिरकार नवनियुक्त कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने संज्ञान लिया और तत्काल इसे बनाने के निर्देश दिए हैं।
जिला बनने के बाद लगातार चल रही थी मांग
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिल जगत ने बताया कि जब भी झुलसे मरीज आते थे। इलाज की पूरी सुविधाएं नहीं होती थी तो प्राथमिक उपचार कर रेफर कर देते थे। लगातार सर्वसुविधायुक्त बर्न यूनिट बनाने की मांग की जा रही थी। आखिरकार यूनिट तैयार होने वाली है। दो माह के बाद जुलाई अंत तक काम पूरा हो जाएगा।
१० बिस्तर में आईसीयू की भी सुविधा
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यह बर्न यूनिट १० बिस्तर का बनाया जाएगा। यूनिट मे आईसीयू, वेंटिलेटर, चिकित्सक वार्ड, स्टाफ नर्स वार्ड सहित अन्य सुविधाएं होगी। पूरी यूनिट ऑक्सीजन सपोर्ट रहेगा। ओपीडी, महिला व पुरुष वार्ड के साथ चार टॉयलेट आदि भी बनाए जाएंगे।
बर्न यूनिट के यह लाभ
० बर्न यूनिट से गरीबों की भी बच सकेगी जान।
० इलाज कराने अन्य शहर नहीं जाना पड़ेगा।
० हर साल 20 से 30 मरीज आते हैं, जिनका इलाज होगा।
० दर्द से कराहते थे मरीज, अब ऐसा नहीं होगा
बर्न यूनिट के अभाव में कई ने तोड़ा दम
जिला अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं होने पर 15 प्रतिशत से अधिक जले मरीज को रेफर कर दिया जाता है। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं। अस्पताल भी पहुंच गए तो उसे इलाज की पूरी सुविधा नहीं होने के कारण रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में मरीज को बर्न यूनिट सुविधा वाले अस्पताल पहुंचने में देर हो जाती है। इलाज में देरी के कारण मौत हो जाती है। इसके अलावा कई गरीब तबके के मरीज बाहर बड़े अस्पताल में पैसा की कमी के कारण जाने से असमर्थ होते थे। ऐसे में दर्द से कराहते हुए जिला अस्पताल में ही दम तोड़ देते थे।
वर्जन
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Published on:
23 Apr 2023 09:01 pm
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