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पुलिस की नौकरी छोड़ नक्सली बनने की धमकी देना इस आरक्षक को पड़ा महंगाा, एसपी ने किया बर्खास्त

- पिछले 10 साल की नौकरी से वह पुलिस प्रताडऩा का हो चुका है शिकार
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जांजगीर चंपा

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Shiv Singh

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Updated: 22 Jun 2018, 7:11 PM IST

पुलिस की नौकरी छोड़ नक्सली बनने की धमकी देना इस आरक्षक को पड़ा महंगाा, एसपी ने किया बर्खास्त

नौकरी छोड़ नक्सली बनने की धमकी देना आरक्षक को पड़ा महंगा, हुआ बर्खास्त

जांजगीर-चांपा. जांजगीर के यातायात शाखा में पदस्थ आरक्षक को नौकरी छोड़ नक्सली बनने की धमकी देना महंगा पड़ गया। एसपी ने उसे तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। हालांकि आरक्षक पहले भी दो बार बर्खास्त हो चुका है। दरअसल बदमाश किस्म का आरक्षक एसपी नीतु कमल व एसडीओपी जितेंद्र चंद्राकर से मोबाइल में बदसलूकी की थी और मुझे नौकरी की परवाह नहीं है कहते हुए गंदे लहजे में एसपी से बात की थी। इस कारण एसपी ने उसे बर्खास्त कर दिया है।

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यातायात शाखा में पोस्टिंग के बाद लंबे समय से अनुपस्थित आरक्षक पुष्पराज सिंह इन दिनों बिना बताए फिर अनुपस्थित था। उसका कहना है कि उसके घर में शादी थी। इस कारण वह छुट्टी में था। इस दौरान जांजगीर पुलिस की टीम उसे गुरुवार को नोटिस देने गई थी कि वह थाने में उपस्थित हो। नोटिस को वह लेने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद जांजगीर एसडीओपी जितेंद्र चंद्राकर ने उससे मोबाइल में बात की थी कि वह नोटिस स्वीकार कर ले, लेकिन आरक्षक पुष्पराज एसडीओपी जितेंद्र चंद्राकर से बदतमीजी पूर्वक बात करते हुए कहा था कि जबरन उसे नोटिस थमाई जा रही है। पिछले 10 साल की नौकरी से वह पुलिस प्रताडऩा का शिकार हो चुका है। ऐसे में वह माओवादी व आईएसआई बनने के लिए विवस है। इतना ही नहीं वह नोटिस लेने से इनकार करने के बाद एसपी से भी बदतमीजी से बात किया। इस मामले की वाइस रिकार्डिंग सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो गई। जिसे लेकर एसपी नीतु कमल ने उसे शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया।

दो बार पहले भी हो चुका बर्खास्त
आरक्षक पुष्पराज सिंह 2009 में पुलिस में मुंगेली जिले में भर्ती हुआ था। 2011-12 में वह चांपा में गांजा पकड़ा था और तस्कर से सांठगांठ कर उसे छोड़ दिया था। जिसके चलते वह बर्खास्त हो चुका था। आईजी के पास वह अपील किया और उसे राहत मिल गई और फिर पुनरू पुलिस में भर्ती हो गया। इसके बाद फिर कर्तव्य में लापरवाही बरतने के कारण फिर 2015 में बर्खास्त हो चुका है। आईजी कार्यालय ने फिर उसकी बात सुन ली और पुनरू बहाल हो गया। इसके बाद वह वर्तमान में वह यातायात शाखा में पदस्थ था।

चल रही डेढ़ दर्जन जांच
बताया जा रहा है कि आरक्षक आदतन बदमाश किस्म का युवक है। उसके खिलाफ डेढ़ दर्जन मामले में जांच चल रही। इससे पहले भी उसने पुलिस अफसरों से बदसलूकी की थी। इसके कारण तत्कालीन पुलिस अफसर उसकी गतिविधियों से परेशान थे। वर्तमान में सुनने में यह भी आया है कि इन दिनों पुलिस परिवार वालों को भड़का भी रहा है। इसके चलते उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई की गई।

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