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प्रशासन ने पंडाल तो तोड़ा लेकिन नहीं तोड़ सके इस युवक का हौसला, भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी है संघर्ष…

एसडीएम व तहसीलदार ने शुक्रवार देर रात अनशनकारी को पहुंचाया जिला अस्पताल

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एसडीएम व तहसीलदार ने शुक्रवार देर रात अनशनकारी को पहुंचाया जिला अस्पताल

एसडीएम व तहसीलदार ने शुक्रवार देर रात अनशनकारी को पहुंचाया जिला अस्पताल

जांजगीर-चांपा. पामगढ़ स्थित शासकीय महामाया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ३१ मई से दो जून तक हुई डीएलएड की परीक्षाओं में हुए नकल के प्रकरण का प्रकरण दिन पर दिन तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में आरोप लगाने वाले पेशे से शिक्षक मुरली मनोहर शर्मा ने प्रशासन पर जांच में देरी का आरोप लगाते हुए १० अगस्त से जिला मुख्यालय स्थित कचेहरी चौक में आमरण अनशन शुरू तो किया,

लेकिन कुछ घंटो बाद देर रात वहां एसडीएम व तहसीलदार वहां पहुंचे और उसका पांडाल ही उखड़वा दिया। इसके बाद शिक्षक जमीन पर बैठने लगा तो उसकी तबीयत खराब होने का बहाना बनाते हुए उसे जबरदस्ती जिला अस्पताल में भर्ती कराया दिया। यहां भी शिक्षक प्रशासन से दो कदम आगे निकला वह जिस पेइंग वार्ड में भर्ती हुआ वहीं पर आमरण अनशन पर बैठ गया। शिक्षक का कहना है कि जब तक इस मामले में प्रशासन निष्पक्ष जांच नहीं होती और माहामाया शासकीय स्कूल के प्रभारी प्राचार्य राजेंद्र शुक्ला का तबादला नहीं होता वह अन्न-जल ग्रहण नहीं करेगा।


इधर शिक्षक मुरली मनोहर शर्मा के आमरण अनशन में बैठने से जिला प्रशासन के हांथ पांव फूलने लगे है। एक तो चुनावी समय है और दूसरा डर यह कि यदि आमरण अनशन के दौरान शिक्षक को कुछ हो जाता है तो कहीं फिर से शिक्षकों सहित आम जनता सड़क पर न उतर जाए। इसे लेकर जिला अस्पताल के डॉक्टरों की टीम शिक्षक के सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

उसे डॉक्टरों द्वारा अलग-अलग टेस्ट कराने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन शिक्षक का कहना है कि वह तक न तो कोई जांच कराएगा और न अन्न-जल ग्रहण नहीं करेगा, जब तक उसकी मांगे मानने के लिए कलेक्टर स्वयं आश्वासन नहीं देते हैं।


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न सुरक्षा न इलाज की सुविधा
आमरण अनशन पर बैठे शिक्षक शर्मा को एसडीएम ने जिला अस्पताल में तो भर्ती करवा दिया है लेकिन उसे इलाज व सुरक्षा की कोई सुविधा नहीं दी गई। उसे जिस पेइंग वार्ड में भर्ती कराया गया वहां इतनी गंदगी है कि कोई भी नहीं रह सकता। इतना ही नहीं वह रात भी अकेले वार्ड में रहा उसके साथ कोई अटेंडर या पुलिस कर्मी तक की ड्यूटी नहीं लगाई गई। अगली सुबह शनिवार को डॉक्टर उसे कुछ टेस्ट कराने के लिए पर्चा थमा कर चला गया। शिक्षक का कहना है कि वह मरे या जिए किसी को कोई परवाह नहीं है, लेकिन वह इसके बाद भी अपनी बात पर अडिग रहेगा।

-इस तरह हम किसी को आमरण अनशन करने की इजाजद नहीं दे सकते हैं। अनशन पर बैठे युवक की स्थिति सही रहे इससे उसे जिला अस्पताल ले जाया गया है।
-अजय उरांव, एसडीएम, जांजगीर