
आवास योजना के चक्कर में तोड़ा घर, अब दर-दर भटक रहा वृद्ध
जांजगीर-चांपा. अब वृद्ध के पास घर नहीं होने से बेघर हो गया और घूम-घूमकर अपना गुजर बसर कर रहा है। समाज के लोग दो वक्त की रोटी देते हैं इसी से उसका गुजारा होता है। यह कहानी नहरिया बाबा रोड के पास स्थित शिवराम कालोनी से लगे डबरी पार में रहने वाले शहजाद खान की है। दरअसल, शहजाद खान का पहले डबरी पार में पुस्तैनी टूटा फूटा मकान था। उसी में वह दर्जी का काम करता था। इस दौरान शहर के कुछ दलाल किस्म के लोग मिले और उसे कहा कि तुझे हम आवास योजना का लाभ दिलवा देंगे। जब पैसे मिलेंगे तो उसमें से कुछ राशि हमें भी दे देना। उनकी बातों में आकर शहजाद खान ने अपना पुराना घर तोड़ दिया और नए मकान की आस में वह झांसे आ बैठा। इस दौरान उसके रहने के लिए मकान भी नहीं थे। वह दलाल के चक्कर काटता रहा। लेकिन उसे आज तक सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया। अब वह न घर का रहा न घाट का। उसके पास रहने के लिए न तो दो गज की जमीन है और न ही छत। समाज के लोगों के पास जाता है तो उसे दो वक्त की रोटी मिल जाता है। जिससे उसका गुजर बसर चलता है।
परिवार में सब कुछ पर चल रहा विवाद
शहजाद खान के बेटे भी हैं लेकिन उसका बेटा बहू के साथ विवाद हो गया जिसके चलते उसके अपने भी पराए हो गए। हालांकि उनके बेटों का कहना है कि उसे पहले भोजन देते थे लेकिन उसकी बातों से बहू नाराज चल रही। जिससे बहू ने भी अनबन हो गया। जिससे उसे दो वक्त रोटी देने वाला भी कोई नहीं है। अब उसे केवल एक ही उम्मीद है या तो नगरपालिका उसके लिए छोटा सा मकान बनाकर दे दे नहीं तो उसे दर-दर भटकना पड़ेगा।
नहीं दिखता आंख तो काम भी छूटा
शहजाद खान पहले हुनरमंद टेलर था। लेकिन अब उसकी आंख भी उसका साथ छोड़ दिया। टेलरिंग के काम के लिए आंख की रोशनी का होना जरूरी है, लेकिन उसके यह अंग भी काम करना छोड़ दिया तो उसे दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही। उम्र के फेर में वह कहीं काम पर भी नहीं जा सकता। जिसके चलते उसके उपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
शहजाद खान के लिए नगरपालिका में आवास योजना के लिए कई बार गुहार लगा चुके, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है। समाज के लोग उसका साथ दे रहे हैं और उसे जरूरी सामान उपलब्ध करा रहे हैं। ताकि उसका जीवन यापन चल सके।
-रफीक सिद्धिकी, प्रवक्का जिला कांग्रेस कमेटी
Published on:
02 Apr 2022 09:38 pm
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