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सिविल सर्जन के रिकार्ड में 35 डॉक्टर, इन्हें दे रहे डीएमएफ से लाखों की सैलरी

जिला अस्पताल में कहने को तो रिकार्ड में 35-35 डॉक्टर हैं, लेकिन समय पर ओपीडी में गिने चुने डॉक्टर ही नजर आते हैं। शेष डॉक्टर या तो अपने निजी क्लीनिक में सेवा देते हैं या फिर अस्पताल से नदारत रहते हैं।

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सिविल सर्जन के रिकार्ड में 35 डॉक्टर, इन्हें दे रहे डीएमएफ से लाखों की सैलरी

सिविल सर्जन के रिकार्ड में 35 डॉक्टर, इन्हें दे रहे डीएमएफ से लाखों की सैलरी

इसके चलते मरीजों को जिला अस्पताल में इलाज के लिए भटकना पड़ता है। दिलचस्प बात यह है कि अधिकतर डॉक्टर डीएमएफ फंड से मोटी सैलरी ले रहे हैं लेकिन उनकी सेवा नाम मात्र की है। इससे सरकार के पैसों की फिजूलखर्ची खुलकर सामने आ रही है। जिसका विरोध करने वाला भी कोई नहीं है। शहर की जनता आज तक न तो जिला अस्पताल में सुविधाओं का जायजा लेने गई है और न ही नेताओं का इस ओर ध्यान गया है। जो शहर के लिए एक ज्वलंत समस्या है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों की लिस्ट देखें तो आप चौंक जाएंगे। 100 बिस्तर के अस्पताल में 35 डॉक्टरों की पोस्टिंग है। यानी हम कह सकते हैं कि प्रत्येक तीन बिस्त के पीछे एक एक डॉक्टर हैं। लेकिन यह केवल आंकड़ों की बाजीगरी है। यहां तो केवल स्टॉफ नर्सेस व जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर के स्टूडेंट के भरोसे जिला अस्पताल संचालित हैं। सुबह के समय ओपीडी में जाकर आप नजारा देखेंगे तो चौंक जाएंगे। तकरीबन एक दर्जन ओपीडी काउंटर में गिने चुने चार से पांच डॉक्टर ही मौजूद रहते हैं। जिसमें एमडी आलोक मंगलम के अलावा दो चार अन्य डॉक्टर नजर आएंगे। जबकि लिस्ट 35 डॉक्टरों की है। जिसमें कुछ ऐसे विशेषज्ञ हैं जिनकी भरमार है। जिसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशुरोग विशेषज्ञ व अस्थि रोग विशेषज्ञ के अलावा निश्चेता विशेषज्ञ की तीन तीन पोस्ट शामिल है। लेकिन ओपीडी टाइम में किसी के दर्शन दुर्लभ होते हैं।


अधिकतर डीएमएफ से भारी भरकम सैलरी का भुगतान


जिला अस्पताल में डॉक्टरों के सैलरी के लिए बड़ी रकम खर्च की जा रही है। ऐसे डॉक्टरों को डेढ़ से दो लाख रुपए तक भुगतान हो रहा है। जिसमें शहर के नामचीन लोगों के रिश्तेदारों के अलावा शीर्ष स्तर के अधिकारियों के रिलेटिव भी शामिल हैं। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि क्या ऐसे डॉक्टर दो लाख रुपए की सैलरी के लायक सेवा देते हैं। बीच में स्वास्थ्य से जुड़ी से खबर बड़ी प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। जिसमें जिले के सबसे बड़े शहर चांपा के बीडीएम अस्पताल में सालों बाद सिजेरियन आपरेशन की शुरुआत हुई थी। जिला प्रशासन ने इस मामले में जमकर अपनी पीठ थपथपाई थी। जबकि दुर्र्भाग्य है कि इतने बड़े अस्पताल में अब तक आखिर आपरेशन क्यों नहीं हो पा रहे थे। जबकि जिला अस्पताल की लिस्ट में तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। तो वहीं तीन शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। इतना ही नहीं तीन निश्चेतना रोग विशेषज्ञ भी हैं। तो आखिर क्या ऐसे डॉक्टर केवल भारी भरकम सैलरी भुनाने के लिए ही पदस्थ हैं।


6 डॉक्टरों को भुगतान डीएमएफ से


जिला अस्पताल के रिकार्ड में मूलत: छह डॉक्टरों को डीएमएफ से मोटी रकम का भुगतान किया जा रहा है। जिसमें डॉ. आलोम मंगलम, डॉक्टर आकाश सिंह राणा, डॉ. हरीश पटेल, डॉ. प्रियंका जोशी, डॉ. अश्वनी राठौर एवं डॉ. नितिन जुनेजा का नाम शामिल है। इतने डॉक्टरों के अलावा और भी कई डॉक्टर हैं जिनकी नियुक्ति किस मद से और कैसे की गई है उसे स्पष्ट नहीं किया गया है। कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं तो एक या दो साल के बांड पर हैं। वहीं कई डॉक्टर ऐसे भी हैं जिनकी मूल पदस्थापना एमसीएच सक्ती है और यहां पोस्टेड हैं।

जिला अस्पताल में योग्यता के हिसाब से डॉक्टरों के वेतन का भुगतान डीएमएफ के अलावा एनएचएम से भी किया जाता है। डीएमएफ मद से छह से सात डॉक्टरों को भुगतान हो रहा है।
- डॉ. अनिल जगत, सिविल सर्जन