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इस पापी पुत्र ने अपने ही पिता कि बेरहमी से कर दी हत्या, पढि़ए पूरी कहानी

मामूली विवाद के चलते अपने पिता को ही मौत के घाट उतार दिया।

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This sinful son murdered his own father

This sinful son murdered his own father

जांजगीर-चांपा. डभरा थानांतर्गत ग्राम ठनगन में कलयुगी बेटे ने मामूली विवाद के चलते अपने पिता को ही मौत के घाट उतार दिया। पुलिस से बचने के लिए बेटे ने पिता की मौत को खुदकुशी का रूप देने के लिए अजीबो गरीब तरकीब अपनाई जिसमें पुलिस उलझी तो लेकिन आरोपी बच नहीं पाया। तीन दिन बाद पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए बेटे को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कलयुगी बेटे को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।


डभरा पुलिस के मुताबिक ठनगन में जगमोहन निषाद पिता गयाराम (47) की 24 अप्रैल को गांव के टेडग़ा डोली खेत में जली हुई लाश मिली थी। पुलिस मामले को हत्या मानकर जांच में जुट गई थी। जांच पड़ताल के बाद पुलिस को सुराग हाथ लगा कि जगमोहन का उसके बेटे से घटना से पहले काफी विवाद हुआ था। इससे आशंका जताई गई कि विवाद के चलते जगमोहन के बेटे ने ही उसकी हत्या की होगी।

पुलिस अपनी आशंका को हकीकत का रूप देने के लिए और सुराग ढूंढने लगी। पुलिस ने जगमोहन के अन्य रिश्तेदारों और आस-पड़ोस के लोगों से पूछाताछ की। इसमें पता चला कि घटना वाली रात ही बाप बेटे में झगड़ा हुआ था। पुलिस ने आरोपी बेटे ऋषि कुमार (21) को हिरासत में लेकर पूछताछ किया। पूछताछ में वह पहले नानुकुर कर पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन जब सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया। उसने पुलिस को बताया कि उसी ने अपने पिता की हत्या कर उसे खुदकुशी का रूब देने की कोशिश की थी।

पुलिस ऋषि कुमार के खिलाफ हत्या की धारा 302, साक्ष्य छिपाने की धारा 201 के तहत मामला दर्ज किया और उसे हिरासत में लिया। इसके बाद उसे शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया। जहां से आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। हत्या की गुत्थी सुलझाने में टीआई विवेक पाटले, एएसआई एसएन मिश्रा, माधव सिंह सहित उनकी टीम का योगदान था।


ऐसे दिया वारदात को अंजाम
ऋषि कुमार ने पुलिस को बताया कि उसके टेडग़ा डोली खार में तीन ट्रैक्टर लकड़ी कटी हुई रखी थी। वहा पर वह अपने पिता को ले गया और खुदकुशी का रूप देने के लिए कहानी गढ़ी। पहले वह अपने पिता का गला दबा दिया और लकड़ी में ढेर में उसे लिटाकर मिट्टी का तेल छिड़कर आग लगा दिया। फांसी का रूप देने के लिए वह अपने घर से गेरवा रस्सी भी साथ लेकर गया था।

रस्सी को वह पेड़ में लटका दिया। ताकि लोग यह समझें कि वह पहले फांसी लगाने की कोशिश किया और असफल होने की स्थिति में अपने उपर आग लगाकर मौत को गले लगा लिया। पेड़ के नीचे बैंक पासबुक, गेरवा रस्सी, शर्ट, चप्पल और टार्च भी रखा था।

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