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निगम और पर्यटन मंडल की अनदेखी से और बुजुर्ग हो गया बूढ़ा तालाब

सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपए कर दिए खर्च, सफाई सिफर, पानी में तैर रही पॉलीथिन व गंदगी

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निगम और पर्यटन मंडल की अनदेखी से और बुजुर्ग हो गया बूढ़ा तालाब

निगम और पर्यटन मंडल की अनदेखी से और बुजुर्ग हो गया बूढ़ा तालाब

डॉ. संदीप उपाध्याय@रायपुर. स्वामी विवेकानंद सरोवर (बूढ़ा तालाब) निगम और पर्यटन मंडल की खींचतान में और बुजुर्ग हो गया है। शहर के सबसे बड़े तालाब की हालत यह है कि यहां पानी में अमानक पॉलीथिन और अन्य कचरा तैर रहा है। पानी में काई तैर रही है। लोगों का कहना है कि पानी से अब बदबू भी आने लगी है। इस ऐतिहासिक तालाब की बर्बादी के लिए शासन प्रशासन पूरी तरह से जिम्मेदार है। उसने यहां के सौंदर्यीकरण के नाम पर कई बार करोड़ों रुपए का बजट जारी किया, बजट खर्च भी हो गया, लेकिन किसी ने यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि तलाब की सफाई की हालत क्या है।

वर्तमान में तालाब की हालत यह है कि यह पूरे पानी में कचरा तैरता हुआ दिख रहा है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग वोटिंग करने व घूमने जाते हैं। नाव रेस की तैयारी करने वाले भी सुबह-सुबह यहां अपनी तैयारी करते दिख जाते हैं। ऐसे में पानी में तैरता हुआ कचरा परेशानी का सबब बनता जा रहा है। यहां अक्सर आने वाले पुरानी बस्ती निवासी विकास सिंह का कहना है कि कचरा पानी में पड़े रहने से उसमें से बदबू आने लगी है। इस तलाब की सफाई की जिम्मेदारी वोट क्लब वालों की है, लेकिन वह इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। तालाब के सौंदर्यीकरण और विकास की बात की जाए तो शासन ने इस पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए हैं, लेकिन तालाब की स्थिति पहले से भी खराब है। पहले जिस तालाब में कमल के फूल खिला करते थे आज वहां जलकुंभी फैली हुई है, जो कि तालाब को पाटती जा रही है। इससे तालाब की खूबसूरती छिन चुकी है।

पुलिस लाइन तक फैला था तालाब

दशकों पहले इस तालाब का आकार बहुत बड़ा हुआ करता था। जो कि वर्तमान में काफी छोटा हो चुका है। आस-पास हुए निर्माण कार्य के चलते तालाब का आकार काफी छोटा हो गया है। लोगों की माने तो पहले बूढ़ा तालाब का विस्तार पुलिस लाइन तक था। अब यह करीब 200-300 मीटर दूर तक सिमट चुका है।

600 साल पुराना है इतिहास

शहर के बीचों बीच स्थित बूढ़ा तालाब का इतिहास ६०० साल पुराना है। कल्चुरी वंश के राजाओं ने इस तालाब को बनवाया था। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद और ऐतिहासिक शिलालेख की वजह से यह देशभर में प्रसिद्ध है। इस तालाब का पानी कभी नहीं सूखता है। इसके साथ ही इस तालाब की यादें स्वामी विवेकानंद से भी जुड़ी हैं। विवेकानंद जब रायपुर में रहा करते थे, तब वह यहां काफी समय बिताया करते थे। वह इस तालाब को तैरकर पार करते थे। इन यादों की वजह से ही यहां उनकी प्रतिमा यहां लगाई गई और इस तालाब का नाम विवेकानंद सरोवर रखा गया है।

कांकरिया झील से होती थी समानता

इतिहासविद रमेंद्र नाथ मिश्र के अनुसार बूढ़ातालाब देखकर अहमदाबाद स्थित कांकरिया झील की याद आती थी। दोनों में काफी समानता है। नागपुर से मिले एक दस्तावेज के अनुसार कल्चुरी वंश के राजाओं के बाद अंग्रेजों को भी बूढ़ातालाब की खूबसूरती काफी आकर्षित करती थी। इस तालाब से 1402 का एक शिला निकला भी मिला है। इसमें रायपुर और तालाब का इतिहास लिखा हुआ है।

त्यौहार में बढ़ा है कचरा

वोट क्लब वालों की माने तो दीपावली के त्यौहार में काफी मात्रा पॉलीथिन व अन्य कचरा निकला है। लोगों ने उसे समेट कर तालाब के किनारे ही डंप कर दिया है। अब वह रोज पानी में बहर कर पूरे तालाब को गंदा कर रहा है। उन्होंने वार्ड के पार्षद से भी कहा है कि वह लोगों को जागरूक करने में मदद करें, जिससे लोग तालाब में गंदगी न डाला। लोग अपने घरों से निकलने वाले पूजा घर के सामान को भी तालाब में ही विसर्जित करते हैं। इससे भी तालाब की गंदगी बढ़ी है।

वर्जन-

बूढ़ा तालाब इस समय पर्यटन मंडल की संपत्ति है। उसे निगम को हैंडओवर करने के लिए पत्र लिखा गया है। इसकी साफ-सफाई होना जरूरी है। हैंडओवर होते ही इसकी साफ सफाई निगम द्वारा कराई जाएगी।

- शिव अनंत तायल, कमिश्नर नगर निगम रायपुर

वर्जन-

तालाब की साफ सफाई रोज कराई जा रही है। हमने हनुमान मंदिर की तरफ एक गेट बनाने की योजना बनाई है। इससे तालाब का कचरा निकालकर वहां डंप किया जाएगा और फिर उसे नगर निगम से हटवाया जाएगा।

-वीरेन विश्वकर्मा, मैनेजर, वोट क्लब, बूढ़ा तालाब