जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय का कलेक्टोरेट मार्ग लोगों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहा है। पिछले छह माह से साढ़े ९ करोड़ की लागत से निर्माणाधीन सड़क मार्ग का कार्य इतनी मंथर गति से हो रहा है कि यह मार्ग जी का जंजाल साबित हो रहा है। दरअसल एनएच से पॉलिटेक्निक चौक तक सड़क तो पूरी तरह से बन चुका है, लेकिन पॉलिटेक्निक चौक से लेकर जिला अस्पताल के मुख्य द्वार तक सिर्फ ५०० मीटर की सड़क निर्माण के कार्य को ठेकेदार ने छोड़ दिया है। जिससे इतनी दूरी की सड़क लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। बताया जा रहा है कि इस मार्ग में चुनाव की वजह से लोगों का आवागमन अधिक था, जिससे काम प्रभावित होता। जबकि इस मार्ग में लोगों का आवागमन होता ही नहीं। क्योंकि कलेक्टोरेट से पॉलिटेक्निक चौक का रूट ही अलग है।
जिला मुख्यालय का कलेक्टोरेट मार्ग जिले के लोगों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है, लेकिन चंद दूरी की आधी अधूरी सड़क लोगों के लिए अब परेशानियों का सबब बन चुका है। दरअसल इस मार्ग में काम अधूरा पड़ा है। यही अधूरी सड़क लोगों के लिए जी का जंजाल बनते जा रहा है। दरअसल, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि इस मार्ग में लोकसभा चुनाव की वजह से लोगों का आवागमन अधिक हो रहा था। जिसके कारण निर्माण कार्य बंद कर दिया गया था। जबकि ऐसा नहीं है। कलेक्टोरेट से पॉलिटेक्निक मार्ग ही अलग है। चुनाव की वजह से लोगों का आवागमन जिला अस्पताल की ओर से नहीं होता। जिस मार्ग में काम अधूरा पड़ा है उस मार्ग में केवल जिला अस्पताल व जिला पंचायत के लोगों का ही आवागमन होता है। इस मार्ग में दिन भर ऐसे लोगों की भीड़ रहती है जो जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा के लिए जाते हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल व रोजगार कार्यालय के लोगों की भीड़ यहां पर रहती है।
इस तरह होती है परेशानी
इस मार्ग में सड़क डिवाइडर का काम हो चुका है। वहीं सड़क निर्माण के लिए बेस बनाकर छोड़ दिया गया है। बेस की गिट्टी व रेत से उड़ रही धूल लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। वाहनों के आने जाने से भारी धूल उड़ती है। जिससे राहगीर परेशान होते हैं। जबकि इसी ५०० मीटर की दूरी पर कई शापिंग काम्प्लेक्स है और हाउसिंग बोर्ड के सैकड़ो मकान है। जिन्हें हजारों लोगों को इस धूल के गुबार का सामना करना पड़ता है। खराब सड़क की वजह से लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। पखवाड़े भर पहले ही स्वास्थ्य विभाग के स्टॉफ नर्स का पति दुर्घटना का शिकार हो गया था।
रात को बढ़ जाता है खतरा
इस मार्ग में रात को चलना खतरों से खाली नहीं है। दरअसल इस मार्ग में रात को विद्युत की व्यवस्था नहीं की गई है। पहले इस मार्ग में रोशनी की व्यवस्था थी, लेकिन सड़क निर्माण के बाद पोल शिफ्ंिटग का कार्य हुआ। तब से इस मार्ग में विद्युत की व्यवस्था नहीं की गई है। जिसके चलते इस मार्ग में घुप्प अंधेरा रहता है। जिससे लोग दुर्घटना के शिकार होते हैं। जबकि इस मार्ग में पहले कई बार मौत भी हो चुकी है। सात साल पहले नगर के एक पटवारी की सड़क हादसे में मौत हुई थी। इसी तरह एक अन्य व्यक्ति की मौत हो चुकी है।