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यहां बिजली बिल पटाने सुबह से शाम तक लगानी पड़ती है लंबी लाइन, पढि़ए खबर आखिर क्या है वजह

- शहर में 12 हजार उपभोक्ताए चार साल से एक ही एटीपी मशीन से पटा रहे बिजली का बिल, प्रस्ताव पर चार साल बाद भी नहीं मिली स्वीकृति

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यहां बिजली बिल पटाने सुबह से शाम तक लगानी पड़ती है लंबी लाइन, पढि़ए खबर आखिर क्या है वजह

जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय में 12 हजार विद्युत उपभोक्ता हैं। इतने उपभोक्ताओं के लिए मात्र एक एटीपी मशीन लगाई गई है। जिसमें बिजली बिल पटाने उपभोक्ताओं को जद्दोजहद करनी पड़ती है। बिल पटाने की अंतिम तिथि में भगदड़ मचने की स्थित नौबत आ जाती है। विभागीय अधिकारियों को उपभोक्ताओं की समस्या से कोई सरोकार नहीं रहता। इधर विभागीय अफसरों का कहना है कि दूसरे एटीपी मशीन के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा हैए लेकिन उसकी स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। जिसके चलते उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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जिले मुख्यालय के लोगों को बिजली का बिल पटाने लोहे के चने चबाने से कम नहीं लगता। शहर के लोगों को एक तो बिजली का बिल समय पर नहीं मिलता। वहीं अंतिम तिथि में जब बिल मिलता है तो उपभोक्ता बिल पटाने विद्युत दफ्तर में बिल पटाने एकबारगी टूट पड़ते हैं। दफ्तर में भगदड़ तब मच जाती है जब लोगों को एक ही मशीन में दो-दो लंबी लाइन लगानी पड़ती है। जिसमें महिला पुरूषों को बिल पटाने सुबह से लेकर शाम तक लंबी लाइन लगानी पड़ती है।

विद्युत मंडल के नियमों के मुताबिक प्रत्येक छह हजार उपभोक्ताओं के पीछे दो एटीपी मशीन लगाने का प्रावधान है पर, जांजगीर शहर में बीते चार सालों से एक ही एटीपी मशीन से काम चलाया जा रहा है। जिसका खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। इन दिनों बिजली बिल पटाने का अंतिम समय आ गया है। लोग त्योहारी सीजन से बचने के लिए पहले से बिजली बिल पटा रहे हैं। शहर के लोग एक साथ बिल पटाने टूट पड़े हैं।

महिलाओं की एक अलग लाइन तो पुरूषों की अलग लाइन लगानी पड़ रही है। एक मशीन होने के कारण शहर के हजारों उपभोक्ताओं को बिल पटाने बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि आधे उपभोक्ता नीयत तिथि के पहले बिल पटाना चाहते हैं, लेकिन कई लोग ऐसे भी होते हैं जो समय अभाव के चलते समय पर बिजली नहीं पटा पाते और उन्हें लंबी लाइन में लगकर बिजली बिल पटाना पड़ता है।

यह होता है असर
समय पर बिजली का बिल नहीं पटने पर उपभोक्ता बिल नहीं पटा पाते। इसके कारण बिजली का बिल पेंडिंग होते जाता है। हालांकि उपभोक्ताओं को एक सप्ताह का अधिभार सहित देयक राशि का भुगतान करना पड़ता है। इससे उन्हें एक दो प्रतिशत राशि अधिक देनी पड़ती है। इसके अलावा जिन उपभोक्ताओं के पास बजट का अभाव होता है वे बिल पटाने कोताही बरतते हैं। इससे विद्युत मंडल को भी पेंडिंग बिल की फेहरिस्त बढ़ते जाती है। यही बिल जब नहीं पटता तो विभागीय अधिकारी उपभोक्ताओं पर दबाव बनाना शुरू कर देते हैं। उपभोक्ता जब बिल जमा करने बेबस हो जाता है तो उसका कनेक्शन काटने की धमकी मिलना शुरू हो जाता है।

दूसरे मशीन का भेजा प्रस्ताव
विद्युत मंडल के अधिकारियों के मुताबिक शहर में एक और एटीपी मशीन लगाने प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन शासन ने इसके लिए मंजूरी नहीं दी है। ज्ञात हो कि नैला के लोगों ने बिजली बिल दफ्तर की दूरी को देखते हुए नैला में ही बिल पटाने के लिए एटीपी मशीन की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांग अधूरी रह जा रही है। ज्ञात हो कि नैला में लगभग पांच हजार उपभोक्ता हैं। जिन्हें बिजली का बिल पटाने शहर के आउटर में दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। यदि नैला में मशीन लग जाएगी तो उन्हें बिल जमा करने में सुविधा मिलती।

लगेगी दूसरी मशीन
शहर में एक ही एटीपी मशीन है। दूसरी मशीन लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही दूसरी मशीन लगाई जाएगी। ताकि शहर के लोगों को सुविधा मिल सके- पीएल सिदार, एसई, सीएसपीडीसीएल