
घर में कई बार दोनों टाइम खाना भी नहीं बन पाता
जांजगीर-बलौदा. मैं अनोखी रात्रे बलौदा ब्लॉक अंतर्गत छोटा मधईपुर गांव में रहती हूं और छोटा मधईपुर स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ती हूं। मेरे पिता गांव में रोजी मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं।
घर में कई बार दोनों टाइम खाना भी नहीं बन पाता है। इसलिए मेरा सपना है कि मैं खूब पढ़ूं और पुलिस विभाग की बड़ी अधिकारी बनू। इससे मैं अपने माता-पिता का नाम रोशन करने साथ ही देश व समाज की सेवा भी कर सकूंगी। इतना कह कर नन्ही अनोखी की आंखे नम हो गईं।
19 अप्रैल को छोटा मधईपुर प्राईमरी स्कूल में जब पत्रिका की टीम पहुंची तो देखा कि एक छह साल की एक बच्ची खिड़की से रास्ते को ताक रही है। स्कूल में उसके अलावा और कोई नहीं था। अंदर जाकर पत्रिका की टीम ने अनोखी से बात की और उसने जो बताया वह चौकाने वाला था। अनोखी ने बताया कि वह रोज पढ़ाई करने के लिए समय पर सुबह-सुबह स्कूल पहुंच जाती है। स्कूल के सभी शिक्षक भी समय पर आते हैं,
लेकिन मशीन में फिंगर लगाकर चले जाते हैं। इसके बाद वह लोग स्कूल खत्म होने के समय वापस आते हैं। स्कूल में आने वाले अन्य बच्चे मध्यान्ह भोजन खाकर अपने-अपने घर चले जाते हैं। खाना बनाने वाली दीदी बचा हुआ भोजन लेकर चली जाती है। दीदी उसे कह कर जाती है कि गुरुजी के आने के बाद जाना। मैं अकेले स्कूल में किताब को ताकती रहती हूं मुझे कोई कुछ पढ़ाने वाला भी नहीं रहता है। अनोखी का कहना है कि इस तरह से वह कुछ सीख और पढ़ नहीं पाती है।
एक किलोमीटर दूर है दूसरा स्कूल
छोटा मधईपुर स्कूल के बजाए इतनी कम उम्र मैं और कहीं जा भी नहीं सकती हूं। दूसरा स्कूल एक किलोमीटर दूर है। स्कूल आने से मुझे खाना मिल जाता है तो उसे खा कर अपनी दिन की भूख मिटा लेती हूं और फिर स्कूल में अकेले बैठकर पढऩे का प्रयास करती हूं। घर में भी कोई और नहीं है जो मुझे पढ़ा सके। ऐसे में मैं अपना भविष्य कैसे गढ़ सकूंगी।
जांच कर कार्यवाही
गर्मी में बच्चे कम आ रहे हैं, लेकिन शिक्षकों को पूरा समय स्कूल में रहना है। यदि ऐसा है तो इसकी जांच कर कार्यवाही की जाएगी।
जीपी भास्कर, डीईओ, जांजगीर
Published on:
22 Apr 2018 12:01 pm
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